Kanwar Yatra
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इस साल कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू हो चुकी है और इसका समापन 11 अगस्त 2026 को होगा. महादेव का प्रिया माह सावन के शुरू होने के साथ ही हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर हर दिन हजारों कांवड़िया जा रहे हैं. कांवड़ यात्रा के दौरान मुजफ्फरनगर जनपद में एक ऐसी अनोखी कांवड़ भी पहुंची थी, जिसने हर किसी को सतयुग के श्रवण कुमार की याद दिला दी. इस कांवड़ को लाने वाला शिवभक्त अपनी कांवड़ के एक पलड़े में अपनी बुजुर्ग मां तो दूसरे में बुजुर्ग चाची को बैठकर कांवड़ यात्रा कर रहा है.
भगवान शिव शंकर को करेंगे जलाभिषेक
आपको बता दें कि मुजफ्फरनगर जनपद के दूल्हेरा गांव निवासी यशवीर 24 जुलाई को हरिद्वार हर की पौड़ी से गंगाजल उठाकर अपनी कांवड़ के एक पलड़े में अपनी 70 वर्षीय मां कृष्णा देवी और दूसरे पलड़े में अपनी 65 वर्षीय चाची फूलों को बैठाकर अपनी यात्रा कर रहे हैं. कांवड़ में मां और चाची को बैठाकर लाने के बारे में जब इस शिव के भक्त यशवीर से पूछा गया तो उसका कहना था कि ये मैसेज है समाज के उन लोगों के लिए जो अपने मां-बाप पर अत्याचार करते हैं. यशवीर का कहना है कि सभी को अपने माता-पिता से प्रेम और उनकी सेवा करनी चाहिए. आपको मालूम हो कि यशवीर अपनी मां और चाची के वजन सहित 115 किलो की कांवड़ अपने परिवार के अन्य लोगों के साथ लेकर चल रहे हैं. यशवीर का कहना है कि अपने गांव के शिवालय में पहुंचकर वह शिवरात्रि के दिन भगवान शिव शंकर को जलाभिषेक करेंगे.
माता-पिता की करें सेवा
शिवभक्त यशवीर ने कहा कि कांवड़ के एक साइड हमारी मम्मी हैं और दूसरी साइड हमारी चाची हैं. उन्होंने कहा कि हर की पौड़ी से जल लेकर पहले भी महादेव को जल अर्पित कर चुका हूं. वह आठ साल पहले गंगाजल लेकर आए थे. उन्होंने कहा कि दूसरे के लिए यह मैसेज देना चाहेंगे कि अपने माता-पिता की सेवा करो. जैसे कि हम श्रवण कुमार की तरह कांवड़ लेकर आए हैं. उन्होंने कहा कि इस कांवड़ यात्रा को लेकर व्यवस्था अच्छी है. उधर, यशवीर की मां कृष्णा देवी का कहना है कि हम तो यही चाहते हैं कि सब का घर परिवार ठीक चले. सभी लोग अपने माता-पिता का सम्मान करें. कोई माता-पिता को तंग ना करें.