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Shankh ka Mahatva: क्या है शंख का धार्मिक महत्व, इसका सही प्रयोग से चमक जाएगा आपका भाग्य, पैसों की होने लगेगी बारिश, आर्थिक तंगी हो जाएगी दूर 

हिंदू धर्म में शंख का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. इसे पवित्रता, सुख-समृद्धि और विजय का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शंख समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों में से एक है. कहते हैं जहां शंख होता है वहां मां लक्ष्मी जरूर होती हैं. 

Shankh ka Mahatva
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 07 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:16 PM IST

हिंदू धर्म में शंख का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. इसे पवित्रता, सुख-समृद्धि और विजय का प्रतीक माना जाता है. शंख मुख्य रूप से एक समुद्री जीव का ढांचा होता है. पौराणिक रूप से शंख की उत्पत्ति समुद्र से मानी जाती है. कहीं-कहीं पर इसको लक्ष्मी जी का भाई भी मानते हैं. कहते हैं जहां शंख होता है वहां मां लक्ष्मी जरूर होती हैं. मंगल कार्यों के अवसर पर और धार्मिक उत्सवों में इसको बजाना शुभ माना जाता है. घर में पूजा-वेदी पर शंख की स्थापना की जाती है. शंख को दीपावली, होली, महाशिवरात्रि, नवरात्र, रवि-पुष्य, गुरु-पुष्य नक्षत्र आदि शुभ मुहूर्त में स्थापित किया जाना चाहिए. 

वैज्ञानिक रूप से शंख का क्या है महत्व 
विज्ञान के अनुसार शंख की ध्वनि महत्वपूर्ण होती है. वैज्ञानिकों के अनुसार शंख-ध्वनि से वातावरण का परिष्कार होता है. इसकी ध्वनि के प्रसार-क्षेत्र तक सभी कीटाणुओं का नाश हो जाता है. शंख में थोड़ा सा चूने का पानी भरकर पीने से कैल्शियम का पक्ष बेहतरीन हो जाता है. शंख बजाने से ह्रदय रोग और फेफड़ों की बीमारियां होने की सम्भावना कम हो जाती है. इससे वाणी दोष भी समाप्त होता है. 

शंख कितने प्रकार का होता है और इनकी क्या है महिमा 
शंख कई प्रकार के होते हैं और सभी प्रकारों की विशेषता एवं पूजन-पद्धति भिन्न-भिन्न है. शंख की आकृति के आधार पर सामन्यतः इसके तीन प्रकार माने जाते हैं. ये तीन प्रकार के होते हैं दक्षिणावर्ती शंख, मध्यावर्ती शंख और वामावर्ती शंख. भगवान विष्णु का शंख दक्षिणावर्ती है और लक्ष्मी जी का वामावर्ती. वामावर्ती शंख अगर घर में स्थापित हो तो धन का बिलकुल अभाव नहीं होता. इसके अलावा महालक्ष्मी शंख, मोती शंख और गणेश शंख भी पाया जाता है. 

सामान्य रूप से कैसे करें शंख का प्रयोग
सफेद रंग का शंख ले आए. इसको गंगाजल और दूध से धोकर शुद्ध कर लें. इसके बाद गुलाबी वस्त्र में लपेट कर पूजा के स्थान पर रखें. प्रातः और सायं काल पूजा के बाद तीन-तीन बार इसको बजाएं. बजाने के बाद इसको धोकर पुनः वहीं रखें. 

शंख के प्रयोग में क्या सावधानियां रखें
शंख को किसी वस्त्र में या किसी आसन पर ही रखें. प्रातःकाल और संध्या काल में ही शंख ध्वनि करें. हर समय शंख न बजाएं. शंख को बजने के बाद धोकर ही रखें. अपना शंख किसी और को न दें और न ही दूसरे का शंख प्रयोग करें.

 

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