शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की पूजा और भक्ति के लिए खास माना जाता है. इन नौ दिनों में भक्त माता के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और उन्हें फूल, फल व मिठाई का भोग लगाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है. माना जाता है कि मां दुर्गा की पूजा में कुछ चीजें चढ़ाने से बचना चाहिए. चलिए बताते हैं ऐसी 5 चीजों के बारे में, जिन्हें नवरात्रि में माता की पूजा के दौरान इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी जाती है.
मां दुर्गा को न चढ़ाएं तुलसी के पत्ते
हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत पवित्र माना जाता है. भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी के पत्तों का खास महत्व है. हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा की पूजा में तुलसी दल चढ़ाने से बचना चाहिए. इसलिए पूजा की थाली तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखें. माता को भोग लगाते समय पूजा की परंपरा के अनुसार सामग्री का चुनाव करें.
धतूरा और आक के फूल चढ़ाने से बचें
धतूरा और आक यानी मदार के फूलों का इस्तेमाल मुख्य रूप से भगवान शिव की पूजा में किया जाता है. मां दुर्गा की पूजा में इन फूलों को चढ़ाने की परंपरा नहीं है. नवरात्रि में माता को लाल गुड़हल और दूसरे ताजे फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है. इसलिए पूजा के लिए फूल खरीदते समय उनकी ताजगी और साफ-सफाई का ध्यान रखें.
कनेर और केतकी के फूल न चढ़ाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा की पूजा में कनेर और केतकी के फूलों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. पूजा के लिए ऐसे फूल चुनें, जो साफ और ताजे हों. फूल चढ़ाते समय अपनी परंपरा और पूजा के नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी है.
बासी और खराब फल न चढ़ाएं
मां दुर्गा को भोग लगाने के लिए ताजे फल इस्तेमाल करने चाहिए. कटे हुए, सड़े-गले या खराब हो चुके फलों को पूजा में शामिल करने से बचें. भोग तैयार करने से पहले फलों को अच्छी तरह देख लें. धार्मिक मान्यताओं में पूजा की सामग्री की शुद्धता को खास महत्व दिया जाता है.
तामसिक भोजन का भोग न लगाएं
नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के दौरान सात्विक भोजन का विशेष महत्व माना जाता है. इस दौरान माता को प्याज और लहसुन से बने पकवानों का भोग लगाने से बचने की परंपरा है. इसके बजाय आप फल, मिठाई, हलवा और खीर जैसी चीजें अर्पित कर सकते हैं.