Shardiya Navratri 2026 Maa Durga Vahan: हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है. एक साल में चार नवरात्रि (एक चैत्र नवरात्रि, दूसरी शारदीय नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि) पड़ती है. नवरात्रि में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के स्वरूप शैलपुत्री की आराधना की जाती है. दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नवरात्रि के नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की की जाती है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा स्वर्ग लोक से धरती पर अपने भक्तों के बीच वास करने आती हैं. नवरात्रि में मां दुर्गा की सच्चे मन से आराधना करने से माता रानी की कृपा बरसती है. घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है. मां दुर्गा का वाहन वैसे तो शेर है लेकिन इस बार शारदीय नवरात्रि में माता रानी हाथी पर सवार होकर आ रही हैं और मुर्गे पर उनकी विदाई होगी. आइए जानते हैं आखिर माता रानी के वाहनों को लेकर क्या मान्यता है?
किस दिन से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि
द्रिक पंचांग के मुताबिक शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 11 अक्टूबर 2026 की रात 9 बजकर 30 मिनट पर होगा. ऐसे में शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर दिन रविवार से ही शुरू होगी और इसका समापन 20 अक्टूबर 2026 को दशहरा के दिन होगा.
मां दुर्गा के वाहनों को लेकर क्या है मान्यता
नवरात्रि में मां दुर्गा के वाहन का भी विशेष महत्व माना जाता है. नवरात्रि में मां दुर्गा किस वाहन पर सवार होकर स्वर्ग लोक से धरती पर आती हैं, इससे सालभर होने वाली घटनाओं का अंदाजा लगाया जाता है. देवी के कुछ वाहन शुभ तो कुछ अशुभ संकेत देते हैं. नवरात्रि में मां दुर्गा किस वाहन पर आएंगी और किस पर जाएंगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि नवरात्रि किस दिन शुरू हो रही है. इस संबंध में देवी भागवत में एक श्लोक है- शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे, गुरौ शुक्रे दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता. धर्म शास्त्रों में मां दुर्गा के वाहन के रूप में हाथी, घोड़ा, नौका और पालकी का उल्लेख मिलता है.
हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
नवरात्रि का शुभारंभ रविवार या सोमवार के दिन होने पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं. शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत रविवार से हो रही है, ऐसे में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं. ज्योतिषाचार्य के मुताबिक मां दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना बेहद शुभ माना जाता है. आपको मालूम हो कि हाथी को सुख-समृद्धि, स्थिरता और वैभव का प्रतीक माना गया है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि जब मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर स्वर्ग लोक से धरती पर आती हैं तो देश और समाज में धन-धान्य की वृद्धि होती है और खुशहाली का वातावरण बनता है. किसी भी कार्य में मेहनत का फल प्राप्त होता है. इसके साथ ही मां दुर्गा का हाथी पर आना अच्छी वर्षा का प्रतीक है.
माता रानी का पालकी पर आगमन शुभ या अशुभ
देवी पुराण के अनुसार नवरात्रि का शुभारंभ जब गुरुवार या शुक्रवार के दिन होता है तो मां दुर्गा पालकी यानी डोली में बैठकर आती हैं. शास्त्रों में मां दुर्गा का पालकी पर आगमन को शुभ नहीं माना जाता. इससे देश-दुनिया में महामारी, प्राकृतिक आपदा, उपद्रव, दंगे और जन हानि जैसी स्थितियां पैदा होती हैं.
मां दुर्गा कब आती हैं घोड़ा पर सवार होकर
नवरात्रि का शुभारंभ जब शनिवार या मंगलवार के दिन होता है तो मां दुर्गा घोड़ा पर सवार होकर आती हैं. आदिशक्ति का घोड़े पर सवार होकर पृथ्वी लोक पर आना सत्ता परिवर्तन या युद्ध का प्रतीक होता है. घोड़ा पर आना विपक्ष के लिए शुभ और सत्ता पक्ष के लिए अशुभ होता है.
मां दुर्गा कब आती हैं नाव पर
नवरात्रि का शुभारंभ जब बुधवार को होता है तो मां दुर्गा नाव पर सवार होकर आती हैं. माता रानी का नाव पर आगमन शुभता का प्रतीक होता है. नाव पर आने से बारिश अच्छी होती है. फसल की पैदवार खूब होती है. श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
मां दुर्गा की किस वाहन पर होती है विदाई
मां दुर्गा की विदाई विजयादशमी के दिन होती है. यदि इस दिन रविवार और सोमवार है तो माता रानी भैंसे पर सवार होकर जाती हैं. इसका प्रभाव देश के लिए अशुभ होता है. यह रोग और शोककारक स्थितियां बनाता है. यदि मां दुर्गा की विदाई के दिन शनिवार या मंगलवार है तो माता रानी चरणायुध यानी मुर्गा पर सवार होकर जाती हैं. मां दुर्गा का मुर्गा पर सवार होकर जाना अशुभ माना जाता है. यदि आदिशक्ति की विदाई बुधवार या शुक्रवार के दिन हो तो देवी दुर्गा हाथी पर सवार होकर जाती हैं. यह शुभ माना जाता है. गुरुवार के दिन दशमी हो तो देवी दुर्गा की सवारी मनुष्य होता है. यह शुभ फलदायक होती है.
इस बार किस सवारी पर होगी मां की विदाई
शारदीय नवरात्रि 2026 का समापन 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को होगा. देवी भागवत पुराण के मुताबिक मंगलवार और शनिवार को देवी का प्रस्थान चरणायुध वाहन बताया गया है. चरणायुध का अर्थ परंपरा में मुर्गे, कुक्कुट से जोड़ा जाता है. ऐसे में शारदीय नवरात्रि 2026 मां की विदाई मुर्गे पर होगी. मुर्गे पर मां दुर्गा की विदाई शुभ नहीं मानी जाती है. इस वाहन को शोक, आपसी कलह और प्राकृतिक आपदाओं का प्रतीक माना जाता है. मां दुर्गा जब इस वाहन पर सवार होकर जाती हैं तो अशांति फैलती है. देवी भागवत में वर्णित श्लोक के अनुसार...
शशि सूर्यदिने यदि सा विजया महिषागमने रुजशोककरा
शनिभौमदिने यदि सा विजया चरणायुधयानकरी विकला
बुधशुक्रदिने यदि सा विजया गजवाहनगा शुभवृष्टिकरा
सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहनगा शुभसौख्यकरा.