सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की पूजा के दौरान चढ़ाए जाने वाले बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अब कचरे में नहीं फेंकी जाएगी. राजस्थान की राजधानी जयपुर में नगर निगम ने धार्मिक आस्था को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए 'शिवार्पणम्' नाम से एक अनोखी पहल शुरू की है. इस अभियान के तहत मंदिरों से निकलने वाले निर्माल्य को वैज्ञानिक तरीके से जैविक खाद में बदला जाएगा. बाद में यही खाद 'शिवार्पणम्' प्रसाद पैकेट के रूप में श्रद्धालुओं और आम लोगों को वितरित की जाएगी.
अभियान के पहले चरण में शहर के पांच प्रमुख शिवालयों को शामिल किया गया है. इनमें ताड़केश्वर महादेव, झारखंड महादेव, जंगलेश्वर महादेव, चमत्कारेश्वर महादेव और रोजगारेश्वर महादेव मंदिर शामिल हैं. इन मंदिरों से प्रतिदिन नगर निगम का ईवी हॉपर पूजन सामग्री को अलग से एकत्र करेगा, ताकि इसे सामान्य कचरे में जाने से रोका जा सके.
खाद किया जाएगा तैयार
एकत्र किए गए बेलपत्र, फूल और अन्य निर्माल्य को पास के नगर निगम उद्यान में ले जाया जाएगा. वहां श्रेडर मशीन से इसकी प्रोसेसिंग की जाएगी. इसके बाद कम्पोस्ट पिट में डिकम्पोजर कल्चर की मदद से करीब 30 दिनों में उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार होगी. तैयार खाद को आकर्षक पेपर पैकेट में पैक कर 'शिवार्पणम्' प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को दिया जाएगा.
नगर निगम आयुक्त के अनुसार, भगवान शिव को अर्पित बेलपत्र और पुष्प श्रद्धा और आस्था के प्रतीक हैं. ऐसे में उनका स्थान कचरे के ढेर में नहीं, बल्कि धरती और प्रकृति की सेवा में होना चाहिए. इस पहल से मंदिर परिसर अधिक स्वच्छ रहेंगे, डंपिंग यार्ड में जाने वाला जैविक कचरा कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा. यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो इस अभियान का विस्तार जयपुर के अन्य मंदिरों तक भी किया जाएगा. सावन में शुरू हुई यह पहल धार्मिक आस्था, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने वाली प्रेरणादायक मिसाल बन सकती है.
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