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Nag Panchami Myths vs Facts: नाग पंचमी पर सांप को दूध पिलाना कितना सही? जानें क्या कहता है विज्ञान और धर्म

नाग पंचमी पर सांप को दूध पिलाने की परंपरा धार्मिक आस्था से जुड़ी है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से सांप के लिए दूध सही आहार है या नहीं, आइए समझते हैं.

Snake Myth vs Fact
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:21 PM IST

नाग पंचमी में सांप को दूध पिलाने का विधान है. कई जगहों पर लोग नाग देवता को दूध चढ़ाते हैं और इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या सांप को सच में दूध पिलाना चाहिए? धार्मिक मान्यता और साइंटिफिक नजरिए से देखें तो दोनों की बात अलग है.

धार्मिक मान्यता में क्यों चढ़ाया जाता है दूध?
हिंदू धर्म में नागों को पूजनीय माना गया है और उनका संबंध भगवान शिव से भी जोड़ा जाता है. भगवान शिव के गले में नाग विराजमान हैं, इसलिए नाग पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. नाग पंचमी पर कई लोग नाग देवता की पूजा करते हैं और दूध चढ़ाते हैं. इसे श्रद्धा, सुख-शांति और नाग देवता की कृपा से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, यह धार्मिक मान्यता है.

क्या सांप दूध पी सकता है?
साइंस के हिसाब से सांप स्तनधारी जीव नहीं है, इसलिए उसके शरीर को दूध की जरूरत नहीं होती. सांप का प्राकृतिक आहार आमतौर पर चूहे, मेंढक, छिपकली और दूसरे छोटे जीव होते हैं. कभी-कभी प्यास या पानी की कमी की स्थिति में सांप दूध पीता हुआ दिखाई दे सकता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दूध उसके लिए जरूरी या फायदेमंद है.

सांप को दूध पिलाना क्यों ठीक नहीं?
सांप का पाचन तंत्र दूध को पचाने के लिए बना नहीं होता. उसे जबरदस्ती दूध पिलाने से उसकी सेहत को नुकसान हो सकता है. इसलिए नाग पंचमी पर भी सांप के मुंह में दूध डालने या उसे जबरदस्ती दूध पिलाने से उसकी मौत हो सकती है. अगर नाग देवता की पूजा करनी है तो दूध को शिवलिंग या नाग देवता की प्रतिमा पर अर्पित किया जा सकता है. इससे धार्मिक आस्था भी बनी रहती है और किसी जीव को नुकसान पहुंचने का खतरा भी नहीं रहता.

पूजा करें, लेकिन सांप को परेशान न करें
नाग पंचमी का त्योहार आस्था और प्रकृति से जुड़ा हुआ है. सांपों को पूजने का मतलब उन्हें पकड़ना या उन्हें कुछ खाने-पीने के लिए जबरदस्ती करना नहीं होना चाहिए. धार्मिक मान्यता का सम्मान करते हुए सांप को सुरक्षित रखना भी जरूरी है. असली श्रद्धा यही है कि पूजा के नाम पर किसी जीव को परेशानी न हो और उसे उसके प्राकृतिक माहौल में रहने दिया जाए.
 

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