Bhagavad Gita: श्रीमद् भगवत गीता सिर्फ एक धर्म ग्रंथ नहीं... कलयुग में सत्यता का है प्रमाण... इसके 18 अध्यायों और 700 श्लोकों में जीवन की हर समस्या का छिपा है समाधान 

श्रीमद् भगवत गीता, जिसे श्री हरि की वाणी माना गया है, जीवन की समस्याओं का समाधान और मोक्ष का मार्ग प्रदान करती है. यह ग्रंथ कर्म, ज्ञान और भक्ति का अद्भुत संगम है.

Shrimad Bhagavad Gita
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 07 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:21 PM IST

श्रीमद् भगवत गीता को हिंदू धर्म का एक प्रमुख ग्रंथ माना जाता है, जिसे स्वयं योग योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन को सुनाया था. यह ग्रंथ न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन जीने की कला और समस्याओं का समाधान प्रदान करता है. गीता के 18 अध्याय और 700 श्लोकों में कर्म, ज्ञान और भक्ति योग का अद्भुत संगम है.

गीता का संदेश
गीता का मुख्य संदेश है कर्म करो, फल की चिंता मत करो. यह जीवन के हर पहलू में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देती है. गीता के उपदेशों को आत्मसात करने से व्यक्ति के जीवन में आत्मज्ञान, ईश्वर भक्ति और मानसिक शांति का विकास होता है. श्रीमद् भगवत गीता को वेदों से भी श्रेष्ठ माना गया है. महर्षि वेदव्यास ने इसे महाभारत के भीष्म पर्व में लिखा है.

गीता का आध्यात्मिक प्रभाव
गीता के पाठ और श्रवण से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक विकास होता है. यह ग्रंथ व्यक्ति को सांसारिक मोह से मुक्त कर ईश्वर की ओर अग्रसर करता है. वराह पुराण में भगवान विष्णु ने स्वयं कहा है कि वे गीता के आश्रय में रहते हैं. गीता का पाठ करने से व्यक्ति के पाप कर्मों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.

गीता की पूजा और पाठ की विधि
श्रीमद् भगवत गीता की पूजा और पाठ करने के लिए सबसे पहले स्नान करके पूजा स्थल को साफ करें. एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान कृष्ण की मूर्ति स्थापित करें. गीता को लाल या पीले कपड़े में लपेटकर रखें. पूजा सामग्री में पीले फल, पुष्प, धूप, दीप और पंचामृत का उपयोग करें. पूजा के बाद गीता के किसी भी अध्याय का पाठ करें और अंत में आरती करें.

गीता का दान और लाभ
गीता का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. विषम संख्या में गीता का दान करने से धन, सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है. यह नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है. गीता के उपदेशों को आत्मसात करने से व्यक्ति के व्यक्तित्व में निखार आता है और जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है. श्रीमद् भगवत गीता न केवल एक धार्मिक ग्रंथ है, बल्कि यह जीवन जीने की कला और समस्याओं का समाधान प्रदान करने वाला एक अमूल्य खजाना है. इसके उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पुरातन काल में थे. गीता के 11वें और 18वें अध्याय के पाठ को मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी बताया गया है.


 

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