12 अगस्त को साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, भारतीय समय के अनुसार ग्रहण की शुरुआत रात 9:04 बजे होगी और यह 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे तक चलेगा. हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. सूर्य ग्रहण को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनमें सबसे खास है ग्रहण के दौरान खाना न खाने की परंपरा. लेकिन क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक वजह भी है? चलिए जानते हैं...
ग्रहण में खाना खाने से क्यों किया जाता है परहेज?
आयुर्वेद में माना जाता है कि हमारे शरीर की पाचन शक्ति का संबंध सूरज की रोशनी से होता है. जैसे शाम होने के बाद शरीर की पाचन शक्ति थोड़ी कम हो जाती है, वैसे ही ग्रहण के समय भी पाचन धीमा होने की मान्यता है. ऐसे में माना जाता है कि अगर ग्रहण के दौरान ज्यादा या भारी खाना खाया जाए, तो उसे पचाने में परेशानी हो सकती है. इससे गैस, अपच, पेट में भारीपन और सुस्ती जैसी परेशानी हो सकती है.
आयुर्वेद क्या कहता है?
आयुर्वेद में शरीर की पाचन शक्ति को 'जठराग्नि' कहा गया है. मान्यता है कि ग्रहण के समय यह कमजोर हो सकती है. इसलिए इस दौरान हल्का खाना खाने या व्रत रखने की सलाह दी जाती है. हालांकि, यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि वैज्ञानिक शोध इस बात को साबित नहीं करते कि सूर्य ग्रहण के समय शरीर की पाचन शक्ति सामान्य समय से कम हो जाती है. इसलिए ग्रहण के दौरान खाना खाने से कोई खास नुकसान होता है, ऐसा वैज्ञानिक तौर पर साबित नहीं हुआ है.
ग्रहण के दौरान क्या करें?
ग्रहण से पहले हल्का और आसानी से पचने वाला खाना खा सकते हैं. पर्याप्त पानी पीते रहें. अगर आप कोई दवा लेते हैं, तो उसे सिर्फ ग्रहण की वजह से बंद न करें. बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के उपवास नहीं करना चाहिए.
क्या ग्रहण में खाना खाने से क्या नुकसान हो सकता है?
ग्रहण के समय खाना खाने से खास नुकसान होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. हां, अगर कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा या तला-भुना खाना खाता है, तो उसे सामान्य दिनों की तरह गैस, एसिडिटी, अपच या पेट भारी होने की समस्या हो सकती है. वहीं, लंबे समय से रखा हुआ या खराब खाना खाने से फूड पॉइजनिंग हो सकती है. इसलिए साफ और ताजा खाना खाना ज्यादा जरूरी है.
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