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Somvati Amavasya 2026: सोमवती अमावस्या कब है? जानें सही तारीख स्नान, दान और पूजा का शुभ समय

मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन में खुशहाली और परिवार में सौहार्द बना रहता है. इसके अलावा पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है. पवित्र नदी में स्नान और दान-पुण्य करने से पापों से मुक्ति तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

Somvati Amavasya 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 12 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:50 PM IST

सनातन धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ-साथ पितरों के लिए तर्पण, पवित्र स्नान और दान-पुण्य करने की परंपरा है. ऐसे में कई लोग यह जानना चाहते हैं कि सोमवती अमावस्या 14 जून को मनाई जाएगी या 15 जून को. तो चलिए आपकी कन्फ्यूजन दूर कर देते हैं.

बता दें कि, हिंदू पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 14 जून 2026, रविवार को दोपहर 12:20 बजे शुरू होगी और 15 जून 2026, सोमवार को सुबह 8:24 बजे तक रहेगी. धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत और पर्व मनाने के लिए उदया तिथि यानी सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि को मान्यता दी जाती है. चूंकि 15 जून की सुबह सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजा-पाठ सोमवार, 15 जून 2026 को किया जाएगा. सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है.

स्नान और दान का शुभ समय
सोमवती अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. 15 जून को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:03 बजे से 4:43 बजे तक रहेगा. वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक रहेगा. मान्यता है कि इन शुभ मुहूर्तों में स्नान, पूजा और दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.

बन रहे हैं विशेष शुभ योग
इस बार सोमवती अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी बन रहे हैं. यह शुभ योग शाम 5:23 बजे से 7:08 बजे तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र में इन योगों को अत्यंत मंगलकारी माना गया है.

क्यों खास होती है सोमवती अमावस्या?
हिंदू धर्म में सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. जब अमावस्या सोमवार को पड़ती है तो इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन में खुशहाली और परिवार में सौहार्द बना रहता है. इसके अलावा पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है. पवित्र नदी में स्नान और दान-पुण्य करने से पापों से मुक्ति तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

ऐसे करें पूजा और दान
इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए. संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है. भगवान शिव का जल और कच्चे दूध से अभिषेक करें तथा बेलपत्र, अक्षत और तिलक अर्पित करें. पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा भी विशेष फलदायी मानी जाती है. दान में चावल, आटा, दाल, नमक, फल, सब्जियां, दूध और चीनी जैसी सफेद वस्तुएं देना शुभ माना गया है. वहीं इस दिन मांसाहार, शराब, क्रोध, कटु वचन और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है.

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