हीरा नगरी सूरत में गणेशोत्सव की धूम हर तरफ देखने को मिल रही है. लेकिन महिधरपुरा इलाके में स्थापित होने वाले गणपति बप्पा हर साल अपने अलौकिक और भव्य स्वरूप के लिए चर्चा में रहते हैं. इस बार यहां भगवान गणेश के लिए मैसूर पैलेस (Mysore Palace) की भव्य थीम पर नक्काशीदार पंडाल तैयार किया गया है. इस पंडाल में विराजित प्रतिमा को गुजरात के सबसे महंगे गणेश जी के रूप में जाना जाता है.
महिधरपुरा: राजसी आभूषणों से सजे बप्पा
सूरत के महिधरपुरा के इस प्रसिद्ध पंडाल में विराजित बप्पा का श्रृंगार पूरी तरह राजसी आभूषणों से किया गया है. बप्पा के मुकुट, बाजूबंद, हार और दूसरे आभूषण तैयार करने में करीब 25 से 30 किलोग्राम सोने और चांदी का इस्तेमाल हुआ है. इन आभूषणों की चमक बढ़ाने के लिए करीब 2 लाख अमेरिकन डायमंड जड़े गए हैं. आयोजकों के अनुसार, बप्पा को इतने भव्य सोने-चांदी के आभूषणों से सजाने की परंपरा पिछले करीब 30 वर्षों से लगातार चली आ रही है.
सोने, चांदी और लाखों अमेरिकन डायमंड के इस्तेमाल के चलते पूरे श्रृंगार की मौजूदा बाजार कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है. हालांकि, सुरक्षा कारणों और धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए पंडाल के आयोजकों ने आभूषणों की सटीक कीमत सार्वजनिक करने से इनकार किया है. आयोजकों का कहना है कि यह भक्तों की आस्था और समर्पण का प्रतीक है, जिसे सिर्फ पैसों के तराजू में नहीं तौला जाना चाहिए.
मैसूर पैलेस की थीम पर तैयार हुआ पंडाल
इस बार पंडाल को मैसूर पैलेस की शाही भव्यता से प्रेरित होकर तैयार किया गया है. पंडाल की नक्काशी और सजावट बप्पा के राजसी स्वरूप को और खास बना रही है. मैसूर पैलेस की शाही भव्यता और उसमें विराजित 'गोल्डन गणेश' के अलौकिक दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. रोजाना सुबह और शाम होने वाली महाआरती में सैकड़ों की संख्या में भक्त शामिल होकर विघ्नहर्ता का आशीर्वाद ले रहे हैं. भारी भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए पंडाल परिसर में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. साथ ही, सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी रखी जा रही है.
नितिन भगत ने बताया, क्यों राजा की तरह सजाए जाते हैं बप्पा
सूरत के महिधरपुरा इलाके की दाडिया शेरी में मैसूर पैलेस की थीम पर गणेश पंडाल तैयार करने वाले नितिन भगत ने बताया कि इस बार पंडाल का प्रारूप मैसूर पैलेस से प्रेरित होकर तैयार किया गया है. उनके मुताबिक, भक्तगण बप्पा को भगवान के साथ-साथ एक राजा की तरह भी पूजते हैं. उनका कहना है कि राजा बिना आभूषणों के अधूरा लगता है, इसलिए बप्पा को भी भव्य गहनों से सजाया जाता है. नितिन भगत ने बताया कि मूर्ति के श्रृंगार में करीब 25 से 30 किलोग्राम सोना-चांदी (मिश्रित) और 1.5 से 2 लाख अमेरिकन डायमंड्स का इस्तेमाल किया गया है. यह परंपरा और श्रृंगार पिछले करीब 30 वर्षों से चला आ रहा है.
मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं चांदी के सामान
इस पंडाल में बप्पा के प्रति भक्तों की आस्था का एक अलग रूप भी देखने को मिलता है. मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार बप्पा को श्रीफल, चांदी के मूषक, चांदी के छत्र और चांदी के छोटे घर अर्पित करते हैं. इसी आस्था और भव्यता के चलते महिधरपुरा के ये गणपति हर साल गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के बीच खास आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं.
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