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परिवार ने छोड़ा, गुरु मां ने अपनाया… संघर्ष कर बनीं महामंडलेश्वर, आज इनके दर्शन को लगती है लाइन

माघ मेले की संगम तट पर साधु-संतों के रंग-रूप के बीच कई ऐसी प्रेरक कहानियां बिखरी हैं, जो सुनने वालों के दिलों को छू जाती हैं. इन्हीं में से एक है सनातनी अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या आनंद गिरी उर्फ टीना मां की.

सनातनी अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी
gnttv.com
  • प्रयागराज,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST
  • छह महीने की उम्र में छिन गया परिवार
  • समाज सेवा से साध्वी बनने तक का सफर

माघ मेले के संगम तट पर साधु-संतों की भीड़ के बीच एक ऐसी कहानी भी है, जो संघर्ष, त्याग और आत्मसम्मान की मिसाल बन चुकी है. यह कहानी है सनातनी अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या आनंद गिरी उर्फ टीना मां की. जिस टीना मां को कभी समाज और परिवार ने ठुकरा दिया था आज वही उनके दर्शन के लिए लाइन में लगता है.

छह महीने की उम्र में छिन गया परिवार
टीना मां का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ, लेकिन महज छह महीने की उम्र में ही किस्मत ने कठोर मोड़ ले लिया. परिवार ने उन्हें किन्नर समझकर गुरु मां को सौंप दिया. बचपन से ही वे अपने असली मां-बाप को नहीं जान सकीं. गुरु मां ही उनकी दुनिया बनीं. मां भी, पिता भी और गुरु भी. पालन-पोषण, संस्कार और सहारा, सब कुछ गुरु मां ने ही दिया.

माता-पिता का नाम न होने से नहीं मिला एडमिशन
जब स्कूल में दाखिले का वक्त आया और माता-पिता का नाम पूछा गया, तो गुरु मां ने गर्व से कहा, 'यह मेरी बच्ची है.' लेकिन कानूनी अड़चनों ने रास्ता रोक दिया. मजबूरी में घर पर ही पढ़ाई शुरू हुई. बाद में किसी तरह स्कूल में एडमिशन मिला, लेकिन वहां भी ताने उनका पीछा करते रहे. तभी उन्हें समझ आया कि वे समाज की नजरों में अलग हैं.

 

गुरु मां के शब्द बने ढाल
जब दुनिया ने तिरस्कार दिया, तब गुरु मां ने उन्हें संभाला. उन्होंने कहा, 'तू अलग जरूर है, लेकिन सबसे अच्छी है.' यही शब्द टीना मां की ताकत बने. पढ़ाई जारी रखी, समाज के तानों को नजरअंदाज किया और ग्रेजुएशन तक का सफर पूरा किया.

समाज सेवा से साध्वी बनने तक का सफर
पढ़ाई के बाद टीना मां समाज सेवा से जुड़ गईं. धीरे-धीरे उनका झुकाव आध्यात्म की ओर बढ़ा. सनातनी अखाड़े से जुड़ते हुए उन्होंने साधना और सेवा के रास्ते को चुना. टीना से टीना मां और फिर आचार्य महामंडलेश्वर बनने तक का सफर आसान नहीं था, लेकिन हर ठोकर ने उन्हें और मजबूत किया. आज माघ मेले के संगम तट पर टीना मां के दर्शन के लिए लोग कतारों में खड़े रहते हैं. वही परिवार, जिसने कभी त्याग दिया था, आज मिलने आता है.

-आनंद राज की रिपोर्ट

 

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