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Shaligram: कार्तिक माह में करें मां तुलसी और भगवान विष्णु के शिला स्वरूप शालिग्राम की पूजा, जीवन में आएगी सुख-समृद्धि 

कार्तिक मास में माता तुलसी और शालिग्राम का विशेष महत्व है. शालिग्राम को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है. पुराणों के अनुसार शंखचूर दैत्य की पत्नी वृंदा के शाप के कारण भगवान विष्णु शिला रूप में परिवर्तित हुए, जिन्हें शालिग्राम कहा गया. कार्तिक महीने में तुलसी और शालिग्राम की पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

Shaligram
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2025,
  • अपडेटेड 9:00 AM IST

शालिग्राम, भगवान विष्णु का शिला स्वरूप है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है. यह विशेष प्रकार का काला पत्थर नेपाल की गंडकी नदी में पाया जाता है. शालिग्राम पर शंख, चक्र, गदा और पद्म की आकृतियां होती हैं, जो इसे और अधिक प्रभावशाली बनाती हैं.

स्कंद पुराण के अनुसार शालिग्राम के दर्शन से समस्त तीर्थों के दर्शन का फल प्राप्त होता है. कार्तिक महीने में तुलसी और शालिग्राम का विवाह हिंदू धर्म में शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक है.

पौराणिक कथा
शालिग्राम के स्वरूप की उत्पत्ति एक पौराणिक कथा से जुड़ी है. शंखचूर नामक दैत्य की पत्नी वृंदा के सतित्व को भंग करने के लिए भगवान विष्णु ने छल का सहारा लिया. वृंदा ने विष्णु को शिला रूप में बदलने का शाप दिया, जिसके फलस्वरूप भगवान विष्णु शालिग्राम के रूप में पूजित हुए. वृंदा ने अगले जन्म में तुलसी के रूप में जन्म लिया.

भगवान विष्णु ने आशीर्वाद दिया कि बिना तुलसी दल के उनकी पूजा अधूरी रहेगी. तभी से तुलसी के बिना शालिग्राम की पूजा अधूरी मानी जाती है. यदि आपके घर में शालिग्राम हैं तो उनकी नियमित रूप से सुबह और शाम दोनों समय पूजा करनी चाहिए. शालिग्राम को घर के मंदिर में स्थापित करें और तुलसी के पौधे के पास ही रखना चाहिए. जिस घर में शालिग्राम स्थापित हैं, वहां प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और अन्य तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए.

शालिग्राम पूजा का महत्व
शालिग्राम की पूजा विधि पूर्वक करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. श्रीमद्देवी भागवत के अनुसार कार्तिक महीने में भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पित करने से 10000 गायों के दान का फल प्राप्त होता है. शालिग्राम के साथ शिवलिंग की पूजा करने से घर में संपन्नता बनी रहती है. महिलाओं को शालिग्राम पूजा से वंचित नहीं किया जा सकता. ईश्वर के किसी भी स्वरूप के प्रति लिंग भेद उचित नहीं है. महिलाएं भी शालिग्राम की पूजा और ध्यान कर सकती हैं. शालिग्राम का विधिपूर्वक पूजन करने से रोग और ग्रह बाधाएं दूर होती हैं और घर में संपन्नता आती है. 

 

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