महंत पद की परंपरागत प्रक्रिया के तहत बटुकों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार किया गया. इस दौरान रामभद्राचार्य उर्फ बालक दास ने उनका अभिषेक कराया और विधि-विधान के साथ उन्हें महंत की गद्दी पर आसीन किया गया. गद्दी संभालने से पहले शास्वत शौर्य का यज्ञोपवीत संस्कार भी संपन्न कराया गया. इसके बाद बालक दास उर्फ रामभद्राचार्य ने उन्हें गुरु दीक्षा दी और धार्मिक परंपरा के अनुसार नया नाम प्रदान किया.
गुरु के सान्निध्य में होगी शिक्षा
11 वर्षीय महंत श्याम नारायण दास के गुरु रामभद्राचार्य उर्फ बालक दास ने बताया कि बालक को महंत की गद्दी तो सौंप दी गई है, लेकिन कम उम्र होने के कारण अभी वे गुरु के सान्निध्य में रहकर शिक्षा और धार्मिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे. उन्होंने कहा कि जब तक बालक पूरी तरह जिम्मेदारियां संभालने योग्य नहीं हो जाते, तब तक मठ का संचालन संरक्षकों की देखरेख में किया जाएगा. गौरतलब है कि 25 जून 2025 को महंत मकसुदनाचार्य के निधन के बाद यह पद रिक्त चल रहा था.
बाल महंत को देखकर लोग हुए हैरान
समारोह में मौजूद लोग 11 साल के बालक को महंत के रूप में देखकर आश्चर्यचकित नजर आए. पत्रकारों ने जब नव नियुक्त महंत से पूछा कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी वह कैसे निभाएंगे, तो उन्होंने बेहद सरल शब्दों में जवाब दिया. बाल महंत ने कहा कि 'गुरु जी जो कहेंगे, जैसे कहेंगे, वैसा ही करूंगा.' उनकी यह सादगी और विनम्रता लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती रही.
आशीर्वाद लेने उमड़े श्रद्धालु
महंत बनने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनसे आशीर्वाद लेने पहुंचे. अभिषेक के दौरान का दृश्य भी काफी आकर्षक रहा. धार्मिक अनुष्ठान के बीच मौजूद लोगों ने पूरे आयोजन को श्रद्धा और उत्साह के साथ देखा. दिलचस्प बात यह रही कि अभिषेक के दौरान घर के लोगों से वीडियो कॉलिंग भी हो रही थी और बाल महंत स्नान के समय मुस्कुराते हुए नजर आए. उनकी मासूमियत और नई जिम्मेदारी का यह संगम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा. हालांकि उम्र अभी केवल 11 साल है, लेकिन श्रद्धालुओं के बीच जिस तरह से वे आशीर्वाद देते दिखाई दिए, उसे देखकर लोगों को लगा कि परंपरा की यह नई कड़ी अब आगे बढ़ चुकी है.
(रिपोर्ट- अनिल अकेला)
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