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Ram Mandir SIT Report: चंपत राय सबके निशाने पर! मिलेगी क्लीन चिट या भुगतेंगे चढ़ावा चोरी का खामियाजा? अब एसआईटी के रिपोर्ट पर सब की नजर

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय विरोधियों और नाराज संतों के सीधे निशाने पर आ गए हैं. मंदिर आंदोलन से जुड़े पुराने नेताओं और अयोध्या के स्थानीय संतों को ट्रस्ट के मुख्य कामकाज से दूर रखने के कारण चंपत राय के खिलाफ अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आ रहा है.

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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और नए राम मंदिर के सर्वेसर्वा चंपत राय सबके निशाने पर हैं. निशाने पर होना लाजिमी भी है, क्योंकि अगर राम मंदिर को खड़ा कर बनवाने का श्रेय चंपत राय को मिला है, तो चढ़ावा चोरी में हुई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी.

यूं तो आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े पूर्णकालिक प्रचारक चंपत राय बेहद सख्त और ईमानदार माने गए, लेकिन जिद्दी और किसी की न सुनने वाले जैसी उनकी छवि ने उन्हें राम मंदिर से जुड़े एक अनकंप्रोमाइजिंग शख्स के तौर पर पहचान दिलाई. राम मंदिर बनने से पहले तक चंपत राय मंदिर निर्माण के लिए समर्पित सबसे बड़े चेहरों में शामिल हो चुके थे. उन्होंने अपना पूरा जीवन मंदिर निर्माण के नाम कर दिया था. उन्हें काम के प्रति समर्पित और अयोध्या के बड़े जानकार के तौर पर भी जाना गया. चूंकि कई दशकों से अयोध्या ही चंपत राय की कर्मभूमि बन गई थी, ऐसे में अयोध्या के तमाम साधु-संतों, छावनियों, अखाड़ों और संतों से उनका अच्छा तालमेल बन गया था. लेकिन जब मंदिर निर्माण की बारी आई, तो चंपत राय ने अयोध्या के ज्यादातर साधु-संतों की बातों को नहीं माना. चाहे ट्रस्ट हो या मंदिर निर्माण, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े नेताओं और संतों को राम जन्मभूमि ट्रस्ट और मंदिर निर्माण से दूर रखा गया.

ट्रस्ट गठन के समय से ही थी नाराजगी
राम मंदिर ट्रस्ट के निर्माण के वक्त से ही ज्यादातर साधु-संत और मंदिर आंदोलन से जुड़े पुराने लोग इस बात से नाराज थे कि मंदिर आंदोलन में जिन लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिन्होंने लाठियां और गोलियां खाईं, जिन साधु-संतों, उनके मठों और छावनियों ने राम मंदिर बनाने में अपनी भूमिका निभाई, उन्हें पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया.

जब राम जन्मभूमि ट्रस्ट का निर्माण हुआ तो उसके अध्यक्ष छोटी छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास जरूर बनाए गए, लेकिन उनकी भूमिका एक पदेन अध्यक्ष तक सीमित कर दी गई. सारी ताकत और शक्तियां चंपत राय में निहित थीं. अयोध्या के सभी मठों के महंत राम जन्मभूमि ट्रस्ट बनने के बाद से ही चंपत राय से नाराज चल रहे थे, लेकिन चूंकि सरकार ने चंपत राय को इतनी ताकत दे रखी थी, इसलिए सभी चुप ही रहते थे.

कई मौकों पर दिखी नाराजगी
कई मौके ऐसे आए जब मुख्यमंत्री की नाराजगी भी दिखाई दी. खासकर धर्मध्वजा आरोहण के वक्त चंपत राय के काम करने के तरीके को लेकर सरकार की नाराजगी सामने आई थी. ट्रस्ट में अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद मौजूद हैं. मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी भी ट्रस्ट में रहे. अयोध्या के डीएम भी इसके ट्रस्टी होते हैं, लेकिन कहा जाता है कि चंपत राय अकेले सब पर भारी थे. इसलिए ट्रस्ट के ज्यादातर सदस्यों ने मंदिर के कामकाज और फैसलों से अपनी दूरी बना ली थी.

अब खुलकर सामने आए विरोधी
अब जबकि चढ़ावे पर चोरी का मामला तूल पकड़ गया है और चंपत राय पर सवाल उठने लगे हैं, उन्हें कटघरे में खड़ा किया जाने लगा है, तो वर्षों से नाराज पुराने आंदोलन से जुड़े बड़े चेहरे, संत और महंतों ने चंपत राय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. विनय कटियार हों, संतोष दुबे हों या छोटी छावनी के महंत कमल नयन दास, सभी ने चंपत राय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. विनय कटियार ने तो साफ कह दिया था कि चंपत राय ने अपराध किया है और वह जल्द ही इस चढ़ावे में हुई चोरी का खुलासा करेंगे, लेकिन फिर उन्होंने यू-टर्न ले लिया और चुप हो गए.

सादगी की छवि, लेकिन जवाबदेही का सवाल
सभी को मालूम है कि चंपत राय अक्खड़, जिद्दी और किसी की न सुनने वाले हो सकते हैं, लेकिन भ्रष्ट नहीं हो सकते. क्योंकि दशकों से राम मंदिर से जुड़े लोगों ने उनका सादगी भरा जीवन देखा है, जो आज भी जारी है. लेकिन चढ़ावे में चोरी का मामला लोगों की आस्था से ऐसा जुड़ गया है कि चंपत राय को लोग क्लीन चिट देने को तैयार नहीं हैं. वजह साफ है कि अब तक ट्रस्ट और पूरा राम मंदिर परिसर उनकी ही देखरेख में चलता रहा है. अगर उनकी जानकारी के बगैर भी चढ़ावे में चोरी हुई, तो जिम्मेदारी उनकी तो बनेगी ही.

क्या ट्रस्ट में बने रह पाएंगे चंपत राय?
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर इतने गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं कि अगर चंपत राय को क्लीन चिट मिल भी जाती है, तो भी ट्रस्ट में उनका रहना अब लगभग असंभव माना जा रहा है. राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के बेहद करीबी माने जाने वाले नृपेंद्र मिश्र ने भी मंदिर के कामकाज में व्याप्त बड़ी गड़बड़ियों को माना, लेकिन चंपत राय के जीवन को निष्कलंक करार दिया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भले ही अपने कार्यक्रम से चंपत राय को दूर रखा, लेकिन उन्होंने भी कहा कि किसी का चरित्र हनन नहीं होना चाहिए. इशारा चंपत राय की तरफ ही माना गया.

अब सबकी नजर SIT जांच पर
अब ऐसा लगता है कि राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नए सिरे से पुनर्गठित किया जाएगा. नया प्रोफेशनल सिस्टम लागू किया जा सकता है और इतने सवाल उठने के बाद अब चंपत राय, अनिल मिश्रा जैसे लोग इस ट्रस्ट से दूरी बना सकते हैं. लेकिन नजर इस बात पर जरूर रहेगी कि क्या SIT इस पूरे चढ़ावा चोरी मामले में इन बड़े चेहरों को, जिसमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव जैसे नाम शामिल हैं, कहीं दोषी करार देती है या नहीं.

(रिपोर्ट- अभिषेक कुमार)

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