Shivling vs Jyotirling: हिंदू धर्म में भगवान शिव को सबसे शक्तिशाली और करुणामय देवताओं में गिना जाता है. वे सृष्टि के संहारक होने के साथ-साथ नए और पवित्र संसार की रचना के प्रतीक भी हैं. भगवान शिव को आदियोगी कहा जाता है, जो तप, त्याग और करुणा का सर्वोच्च स्वरूप हैं. आज देशभर में भगवान शिव की पूजा अलग-अलग रूपों में की जाती है. कहीं शिव-पार्वती की तस्वीरों के माध्यम से, कहीं शिवलिंग के रूप में तो कहीं नटराज की प्रतिमा के रूप में. लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग में क्या फर्क होता है.
शिवलिंग क्या है
शिवलिंग भगवान शिव का सबसे व्यापक और प्रचलित स्वरूप माना जाता है. इसे ब्रह्मांडीय प्रकाश स्तंभ का प्रतीक कहा जाता है, जिसमें भगवान शिव की दिव्य ऊर्जा समाहित होती है. शिवलिंग आमतौर पर बेलनाकार होता है, जिसके ऊपर गोलाई होती है और नीचे एक गोल आधार होता है, जिसे ‘योनि’ कहा जाता है. शिवलिंग का ऊपरी भाग शिव का प्रतीक है, जबकि योनि माता शक्ति यानी देवी पार्वती का प्रतीक मानी जाती है. इस तरह शिवलिंग शिव और शक्ति के मिलन का आध्यात्मिक संदेश देता है.
शिवलिंग कैसे बनाया जाता है
परंपरागत रूप से शिवलिंग पत्थर या संगमरमर से बनाए जाते थे. समय के साथ अब इन्हें धातु, लकड़ी और मिट्टी से भी बनाया जाने लगा है. सोना, चांदी, तांबा और पीतल से बने शिवलिंग भी देखने को मिलते हैं. सावन के महीने में कई श्रद्धालु स्वयं शिवलिंग बनाकर पूजा करते हैं. कुछ लोग बर्फ से शिवलिंग बनाकर ‘बाबा बर्फानी’ यानी अमरनाथ गुफा में स्थापित शिवलिंग का प्रतीक रूप में पूजन करते हैं. हालांकि सबसे अधिक प्रचलित शिवलिंग काले ग्रेनाइट या पत्थर से बने होते हैं.
ज्योतिर्लिंग क्या होता है
ज्योतिर्लिंग भगवान शिव का विशेष और दिव्य स्वरूप माना जाता है. मान्यता है कि ज्योतिर्लिंग मानव द्वारा बनाए नहीं गए, बल्कि ये स्वयं प्रकट हुए हैं. इसलिए इन्हें ‘स्वयंभू’ कहा जाता है. धार्मिक विश्वास के अनुसार, ज्योतिर्लिंग किसी धातु या पत्थर से नहीं बने होते, बल्कि इनमें स्वयं भगवान शिव की ऊर्जा और धरती की मिट्टी का समावेश होता है. यही कारण है कि ज्योतिर्लिंगों को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है.
भारत के 12 ज्योतिर्लिंग
भारत में कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं, जिन्हें सबसे पवित्र और प्रभावशाली माना जाता है. ये देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित हैं. गुजरात में सोमनाथ और नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, आंध्र प्रदेश में मल्लिकार्जुन, मध्य प्रदेश में महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर, उत्तराखंड में केदारनाथ, महाराष्ट्र में भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर और घृष्णेश्वर, उत्तर प्रदेश में काशी विश्वनाथ, झारखंड में वैद्यनाथ और तमिलनाडु में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग स्थित है. ये सभी ज्योतिर्लिंग श्रद्धालुओं के लिए आस्था और शक्ति के प्रमुख केंद्र हैं.
सबसे शक्तिशाली ज्योतिर्लिंग
12 ज्योतिर्लिंगों में काशी विश्वनाथ को सबसे अधिक शक्तिशाली और पवित्र माना जाता है. यह उत्तर प्रदेश के वाराणसी, जिसे काशी भी कहा जाता है, में स्थित है. काशी को भारत की सबसे प्राचीन और पवित्र नगरी माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, काशी विश्वनाथ भगवान शिव स्वयं ब्रह्मांड के स्वामी हैं. ऐसा विश्वास है कि जो व्यक्ति काशी विश्वनाथ के दर्शन करता है और गंगा में स्नान करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.
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