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Ganesh Chaturthi 2026: क्या है गणेश चतुर्थी का पर्व, जानें किस रंग की गणपति मूर्ति का क्या होता है महत्व?

गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को है. इस दिन लोग अपने घरों और पंडालों में गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर पूजा-अर्चना करते हैं. गणेश जी की अलग-अलग मूर्तियां अलग-अलग तरह के परिणाम देती हैं. सबसे ज्यादा पीले रंग की और रक्त वर्ण की मूर्ति की उपासना शुभ होती है. 

Ganesh Chaturthi 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 14 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:14 AM IST

गणेश चतुर्थी का पर्व मुख्य रूप से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है. माना जाता है कि इसी दिन गणेश जी का प्राकट्य हुआ था. यह भी माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश धरती पर आकार अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. गणेश चतुर्थी की पूजा की अवधि, जिसमे गणेश जी धरती पर निवास करते हैं, अनंत चतुर्दशी तक चलती है. इस बार यह पर्व 14 सितंबर से आरंभ हो रहा है और 25 सितंबर तक चलेगा. 

भगवान गणेश की अलग-अलग मूर्तियों का क्या है महत्व 
गणेश जी की अलग-अलग मूर्तियां अलग-अलग तरह के परिणाम देती हैं. सबसे ज्यादा पीले रंग की और रक्त वर्ण की मूर्ति की उपासना शुभ होती है. नीले रंग के गणेश जी को उच्छिष्ट गणपति कहते हैं. इनकी उपासना विशेष दशाओं में ही की जाती है. हल्दी से बनी हुई या हल्दी का लेपन की हुई मूर्ति हरिद्रा गणपति कहलाती है. यह कुछ विशेष मनोकामनाओं के लिए शुभ मानी जाती है. एकदंत गणपति, श्यामवर्ण के होते हैं. इनकी उपासना से अदभुत पराक्रम की प्राप्ति होती है. सफेद रंग के गणपति को ऋणमोचन गणपति कहते हैं. इनकी उपासना से ऋणों से मुक्ति मिलती है. चार भुजाओं वाले रक्त-वर्ण के गणपति को संकष्टहरण गणपति कहते हैं. इनकी उपासना से संकटों का नाश होता है. त्रिनेत्रधारी, रक्तवर्ण और दस भुजाधारी गणेश महागणपति कहलाते हैं. इनके अन्दर समस्त गणपति समाहित होते हैं. सामान्यतः पीले रंग की या रक्त वर्ण की प्रतिमा जिसका आकार मध्यम हो, घर में स्थापित करनी चाहिए .

किस प्रकार गणेश जी की करें पूजा-अर्चना 
गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना दोपहर के समय करें. कलश भी स्थापित करें. लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर मूर्ति की स्थापना करें. दिन भर जलीय आहार ग्रहण करें अथवा केवल फलाहार करें. सायंकाल गणेश जी की यथा शक्ति पूजा करें. घी का दीपक जलाएं. जितनी आपकी उम्र है उतने लड्डुओं का भोग लगाएं. इसके साथ ही दूब भी अर्पित करें. अपनी इच्छा अनुसार गणेश जी के मन्त्रों का जाप करें. चन्द्रमा को नीची दृष्टि से अर्घ्य दें, अन्यथा आपको अपयश मिल सकता है. अगर चन्द्र दर्शन हो ही गया है तो उसके दोष का उपचार कर लें. प्रसाद का वितरण करें तथा अन्न-वस्त्र का दान करें. 

क्या सावधानियां रखें गणेश चतुर्थी का पर्व मनाने में 
चतुर्थी के दिन अथवा पूजा के समय पीले अथवा सफेद वस्त्र धारण करें, काले कपड़े बिलकुल नहीं पहनें. गणेश जी की प्रतिमा अगर घर में स्थापित करते हैं तो वह बहुत बड़ी नहीं होनी चाहिए. अगर स्वयं नदी की मिट्टी से प्रतिमा बनाएं तो उसका फल सर्वश्रेष्ठ होगा. बिना चन्द्रमा को अर्घ्य दिए हुए व्रत का समापन न करें. नजर नीची रखकर अर्घ्य दें. गणेश जी को कभी भी तुलसी दल न चढ़ाएं. क्रोध न करें, वाणी पर नियंत्रण रखें. सात्विकता बनाए रखें. इस बार गणपति पूजा का शुभ मुहूर्त 14 सितंबर को प्रातः 11.01 से दोपहर 01.30 बजे तक रहेगा. 

गणेश जी की उपासना की सबसे महत्वपूर्ण बात 
जहां तक संभव हो, भगवान गणेश की पूजा दोपहर को करें. पूजा में दूर्वा अवश्य अर्पित करें. सम्पूर्ण लाभ के लिए  गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें.  शुभ पहर 14 सितंबर 2026 को सायं 06.00 से 07.30 तक है. इस समय में भगवान गणेश को पीले फूल अर्पित करें. इससे काम में आ रही विघ्न बाधाएं दूर होंगी. मनोकामना की पूर्ति के लिए गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को एक दूब की माला अर्पित करें. माला अर्पित करते समय मन में अपनी मनोकामना दोहराते रहें. यह माला अनंत चतुर्दशी पर हटा दें, आपकी मनोकामना पूर्ण होगी.

 

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