रुद्राभिषेक भगवान शिव की पूजा का सबसे खास तरीका है. इसमें शिवलिंग पर जल और अलग-अलग चीजें चढ़ाई जाती हैं. इस दौरान शिव मंत्रों का जाप भी किया जाता है. मान्यता है कि रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा मिलती है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं. खासकर सावन के महीने में रुद्राभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है.
रुद्र और शिव को एक ही माना जाता है. रुद्र भगवान शिव का प्रचंड रूप है. रुद्राभिषेक में शिवलिंग पर मंत्रों के साथ जल, दूध, शहद, घी जैसी चीजें चढ़ाई जाती हैं. इस पूजा में शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी मंत्रों का पाठ किया जाता है. मान्यता है कि इससे ग्रहों से जुड़ी परेशानियां और जीवन के कष्ट कम होते हैं.
मंदिर में मौजूद शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करना अच्छा माना जाता है. घर में भी पार्थिव शिवलिंग बनाकर अभिषेक किया जा सकता है. मान्यता के अनुसार मंदिर से अधिक नदी के किनारे और उससे भी अधिक पर्वत पर किया गया अभिषेक फलदायी माना जाता है. अगर शिवलिंग उपलब्ध न हो तो अंगूठे को शिवलिंग मानकर भी पूजा की जा सकती है.
मान्यता के अनुसार अलग-अलग चीजों से अभिषेक करने के अलग फल बताए गए हैं. घी से अभिषेक करने पर वंश बढ़ने की कामना की जाती है. गन्ने के रस से मनोकामना पूरी होने की मान्यता है. शक्कर मिले दूध से ज्ञान और विद्या की प्राप्ति मानी जाती है. शहद से अभिषेक करने पर रोग दूर होने की मान्यता है. गाय के दूध से स्वास्थ्य लाभ की कामना की जाती है. शक्कर मिले पानी से संतान सुख की इच्छा पूरी होने की मान्यता है. भस्म से अभिषेक को मोक्ष से जोड़ा गया है.
सावन के सोमवार, शिवरात्रि और प्रदोष को भगवान शिव की पूजा के लिए खास माना जाता है. मान्यता है कि सिद्ध पीठ या ज्योतिर्लिंग के क्षेत्र में इन खास दिनों में शिव के निवास का विचार करने की जरूरत नहीं होती. यहां पूजा का समय शुभ माना जाता है.
मान्यता के अनुसार मनोकामना पूरी करने के लिए रुद्राभिषेक करते समय तिथि का ध्यान रखना चाहिए. कुछ तिथियों में भगवान शिव को माता गौरी के साथ, कैलाश पर या नंदी पर सवार माना जाता है. इन दिनों को शुभ माना गया है. वहीं कुछ तिथियों में भगवान शिव को समाधि, देवताओं की सभा या भोजन करते हुए बताया गया है. ऐसी तिथियों में मनोकामना के लिए रुद्राभिषेक न करने की मान्यता है.