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Vat Savitri Vrat 2026: 16 या 17 मई कब है वट सावित्री? जानें सही तिथि, पूजा मुहूर्त और विधि

Vat Savitri Vrat 2026: हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व होता है. यह व्रत पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अटूट वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है. जिस तरह करवा चौथ का महत्व माना जाता है, उसी तरह वट सावित्री व्रत भी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है.

vat savitri date
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 06 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:13 PM IST

हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व होता है. यह व्रत पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अटूट वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है. जिस तरह करवा चौथ का महत्व माना जाता है, उसी तरह वट सावित्री व्रत भी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है. इस दिन वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है, जो दीर्घायु, स्थिरता और जीवन के निरंतर प्रवाह का प्रतीक माना जाता है. साल 2026 में इस व्रत की सही तिथि को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम है, जिसे समझना जरूरी है. तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर इस साल कब वट सावित्री व्रत है.

16 या 17 मई कब है वट सावित्री व्रत?
उत्तर भारत जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है, जिसे वट अमावस्या भी कहा जाता है. साल 2026 में अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5.11 बजे से शुरू होकर 17 मई को रात 1.30 बजे तक रहेगी. ऐसे में व्रत 16 मई 2026 शनिवार को रखा जाएगा. इस दिन शनि अमावस्या भी पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है. पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7.12 बजे से 8.24 बजे तक रहेगा.

क्यों मनाया जाता है यह व्रत?
पौराणिक कथा के अनुसार, माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे. उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और व्रत की शक्ति से यह संभव किया. तभी से यह व्रत पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है और वैवाहिक जीवन की मजबूती का प्रतीक बन गया है.

दो बार मनाया जाता है वट सावित्री व्रत
देश के अलग-अलग हिस्सों में यह व्रत दो तिथियों पर मनाया जाता है. उत्तर भारत में अमावस्या के दिन और महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में पूर्णिमा के दिन.
2026 में वट पूर्णिमा 29 जून को मनाई जाएगी. पूर्णिमा तिथि 29 जून सुबह 3.06 बजे से शुरू होकर 30 जून सुबह 5.26 बजे तक रहेगी. पूजा का मुहूर्त सुबह 8.55 बजे से 10.40 बजे तक रहेगा.

व्रत की विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल साड़ी पहनें
सोलह श्रृंगार करें
पूजा की टोकरी तैयार करें, जिसमें पंखा जरूर रखें
वट वृक्ष के पास जाकर उसकी सफाई करें और गंगाजल से शुद्ध करें
भगवान शिव, सावित्री और सत्यवान की पूजा करें
पेड़ के चारों ओर सात बार परिक्रमा करें और हर बार धागा बांधें

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