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Kashi: महादेव की नगरी काशी में क्यों मोक्ष की प्राप्ति के लिए आते हैं लोग, जानें आखिर क्यों नहीं है यहां मौत का भय? 

Kashi the City of Mahadev: महादेव की नगरी काशी में मोक्ष पाने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी लोग आते हैं. यहां अंतिम संस्कार मणिकर्णिका या हरिश्चंद्र घाट पर किया जाता है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि यदि किसी ने जीवन की आखिरी सांस काशी में ली तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. खुद भोलेनाथ दिवंगत आत्मा के कानों में तारक मंत्र का उच्चारण करते हैं और जिसके बाद आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है. काशी में मौत को भय नहीं माना जाता. 

Kashi
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:59 PM IST

हिंदू धर्म में महादेव की नगरी काशी को विशेष स्थान प्राप्त है. काशी को वाराणसी और बनारस के नाम से भी जाना जाता है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि काशी की रचना स्वयं भगवान शिव ने की थी और बनारस शहर उनके त्रिशुल पर स्थित है. काशी में विश्वनाथ मंदिर के अलावा और भी कई मंदिर हैं. यहां पर हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं. काशी को मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है. यहां मोक्ष पाने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी लोग आते हैं. काशी में मौत को भय नहीं माना जाता. पौराणिक कथाओं के अनुसार काशी को महादेव कभी नहीं छोड़ते हैं. वह हमेशा काशी में विराजमान रहते हैं.

तारक मंत्र से मोक्ष की प्राप्ति 
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि यदि किसी ने जीवन की आखिरी सांस काशी में ली तो उसे मोक्ष (जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति) की प्राप्ति होती है. स्कंद पुराण के मुताबिक, काशी खंड में इस बात का जिक्र देखने को मिलता है. काशी में जब कभी भी किसी हिंदू की मृत्यु होती है तो शव को अंतिम संस्कार के लिए काशी के मणिकर्णिका घाट या हरिश्चंद्र घाट पर ले जाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि खुद भोलेनाथ दिवंगत आत्मा के कानों में तारक मंत्र राम नाम का उच्चारण करते हैं और जिसके बाद आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है. आपने काशी की यात्रा के दौरान काश्यां मरणं मुक्तिः मंत्र को जरूर सुना होगा. इस मंत्र का मतलब है कि काशी में मृत्यु मोक्ष की ओर ले जाती है. यह मंत्र आत्मा का भौतिक संसार से संबंध तोड़ देता है और तत्काल मोक्ष की प्राप्ति होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी नगरी में मृत्यु के देवता यम की जगह भगवान शिव ही आत्मा को मोक्ष प्रदान करते हैं.

सबसे पहले मां पार्वती को मिला तारक मंत्र का ज्ञान
तारक मंत्र राम नाम, दो मंत्रों अष्टाक्षर ऊँ नमो नारायणाय और पंचाक्षर नमः शिवाय से मिलकर बना है. पौराणिक परंपराओं के अनुसार महादेव ने सबसे पहले माता पार्वती को तारक मंत्र के बारे में बताया था. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि तारक मंत्र का जाप करने से विष्णु सहस्त्रनाम के समान फल की प्राप्ति होती है.

मुक्ति भवन में मौत का इंतजार करते हैं बुजुर्ग लोग
काशी में प्राण त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. ऐसे में देश-विदेश से बुजुर्ग अपने जीवन के अंतिम समय में प्राण त्यागने के लिए काशी आते हैं. ऐसे बुजुर्ग लोगों के रहने के लिए साल 1908 में एक भवन बनाया गया था, जिसका नाम मुक्ति भवन है. इस भवन को बनाने का उद्देश्य यह था ताकि लोग यहां सभी सुख-सुविधाओं के साथ अपने अंतिम समय को अच्छे से बिता सकें. 

आपको मालूम हो कि मुक्ति भवन सिर्फ वे लोग ठहर सकते हैं, जो मृत्यु के बेहद करीब हैं. ये लोग इस भवन में रहकर अपनी कुछ ही दिनों में होने वाली मौत का इंतजार करते हैं, ताकि मोक्ष को प्राप्त कर सकें. ऐसे लोगों को मुक्ति भवन में दो हफ्ते तक रहने दिया जाता है. आपको मालूम हो कि मुक्ति भवन में  रहने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है. मुक्ति भवन में एक रजिस्टर है, जिसमें यहां रहने आए लोगों के नाम लिखे जाते हैं. इनमे ज्यादातर नाम उन्हीं लोगों के हैं, जो यहां रहकर मृत्यु को प्राप्त हुए. मुक्ति भवन की खास बात यह है की यह सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि हर धर्म के लोग रह सकते हैं. यहां लोगों का अंतिम संस्कार भी उनके धर्म की परंपरा के अनुसार किया जाता है. 


 

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