हिंदू धर्म में देवी-देवताओं का पूजा-पाठ रोज किया जाता है. पूजा-पाठ के बाद मंदिर और घरों में लोग शंख बजाते है. हर मंदिर में आपको शंख जरूर देखने को मिल जाएगा. आइए जानते हैं पूजा-पाठ और मंगल कार्यों में शंख क्यों बजाया जाता है?
शंख की धार्मिक और वैज्ञानिक महिमा
ज्योतिषी शैलेंद्र पांडे ने बताया कि शंख को हिंदू धर्म में पवित्र माना गया है. यह समुद्र से उत्पन्न हुआ और इसे माता लक्ष्मी का भाई भी माना जाता है. भगवान विष्णु इसे अपने हाथ में धारण करते हैं. शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन में हुई थी. इसे सागर मंथन के दौरान उत्पन्न 14 रत्नों में से एक माना गया है.
पूजा-पाठ , धार्मिक उत्सवों और मंगल कार्यों में शंख बजाना शुभ होता है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शंख की ध्वनि वातावरण को शुद्ध करती है और कीटाणुओं का नाश करती है. नियमित शंख बजाने से हृदय रोग और फेफड़ों की बीमारियों से बचाव होता है.
शंख के प्रकार और उपयोग
शंख मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं. पहला दक्षिणावर्ती, दूसरा मध्यावर्ती और तीसरा वामावर्ती. दक्षिणावर्ती शंख भगवान विष्णु का प्रतीक है, जबकि वामावर्ती शंख माता लक्ष्मी का प्रतिक है. वामावर्ती शंख घर में स्थापित करने से धन की कमी नहीं होती. शंख को शुभ मुहूर्त में लाकर पूजा स्थान पर स्थापित करना चाहिए.
क्यों बजाते हैं शंख?
पूजा-अर्चना की शुरुआत में शंख बजाकर देवी-देवताओं को आमंत्रित किया जाता है. यह संकेत होता है कि पूजा का समय शुरू हो गया है. शंखनाद को मंगल ध्वनि माना गया है. इसे बजाने से घर में सुख-समृद्धि और सफलता आती है. मान्यता है कि शंख की आवाज से भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियां भाग जाती हैं.
हर धार्मिक अनुष्ठान में शंख बजाना अनिवार्य होता है. शंखनाद से मन और एनवॉयरमेंट दोनों पवित्र हो जाते हैं. इससे पूजा में ध्यान और एकाग्रता बढ़ती है. पूजा के समय विशेष रूप से सुबह और शाम शंख बजाना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि भोजन के समय शंख नहीं बजाना चाहिए. ऐसा करने से घर में अशुभ प्रभाव पड़ता है. शंख को हमेशा पवित्र स्थान में रखें और इसे साफ-सुथरा बनाए रखें. शंख कई तरह के होते हैं- दक्षिणावर्ती शंख, वामावर्ती शंख और गणेश शंख.
शंख बजाने के फायदे
शंख बजाना सिर्फ धार्मिक कारणों से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी बेहद लाभकारी है. जब शंख बजाया जाता है तो इससे अल्ट्रासोनिक तरंगें निकलती हैं. ये अल्ट्रासोनिक तरंगें एनवॉयरमेंट की हवा को साफ करती हैं और बैक्टीरिया को नष्ट करती है. शंख बजाते समय गहरी सांस लेकर जोर से फूंकना पड़ता है. शंख बजाने से फेफड़ों की एक्सरसाइज होती है. इससे सांस लेना आसान हो जाता है. अस्थमा और दिल से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है. शंख बजाने से दिमा की तंत्रिकाओं को उत्तेजना मिलती है.
इससे मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद दूर होती है. शंख से पैदा हुई तरंग 2 हजार हर्ज से ज्यादा फ्रीक्वेंसी की होती हैं. ये तरंगें नकारात्मक ऊर्जा को खत्म कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं. शंख बजाना सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा नहीं है बल्कि यह आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. शंख सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है. नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है और सेहत को भी फायदा होता है. यही कारण है कि हजारों वर्षों से मंदिरों और घरों में पूजा-पाठ के दौरान शंख बजाने की परंपरा चली आ रही है. यदि इसे सही समय और विधि से बजाया जाए तो यह जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है.