सावन की शिवरात्रि भगवान शिव की उपासना के लिए बेहद खास मानी जाती है. ज्योतिष के अनुसार, इस दिन महादेव की पूजा, अभिषेक, मंत्र जाप और व्रत करने से जीवन की कई परेशानियों को दूर करने में मदद मिल सकती है. मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का प्राकट्य हुआ था और इसी दिन उनके विवाह की भी मान्यता है. हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि आती है, लेकिन सावन में पड़ने वाली शिवरात्रि का महत्व और बढ़ जाता है.
इस दिन सुबह स्नान करके भगवान शिव की पूजा का संकल्प लें. सबसे पहले शिवलिंग पर जल अर्पित करें और इसके बाद दूध, दही, घी, शहद आदि से अभिषेक कर सकते हैं. पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें. रात में शिव स्तुति या रुद्राष्टक का पाठ करना भी शुभ माना जाता है. चार पहर पूजा करने वाले भक्त पहले पहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घी और चौथे में शहद से अभिषेक कर सकते हैं. हर पहर में जल जरूर अर्पित करें.
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार धन संबंधी परेशानी दूर करने के लिए शिवरात्रि पर दूध, दही, शहद, शक्कर और घी से भगवान शिव का अभिषेक करें. इसके बाद शिवलिंग पर जल की धारा अर्पित करें और मन में धन-समृद्धि की प्रार्थना करें.
संतान सुख की इच्छा रखने वाले लोग शिवरात्रि पर शिवलिंग पर घी अर्पित करने के बाद जल चढ़ा सकते हैं. इसके बाद भगवान शिव से संतान सुख की प्रार्थना करें. इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ करना चाहिए.
जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है, वे शिवरात्रि पर अपनी आयु के बराबर बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं. प्रत्येक बेलपत्र चढ़ाते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें. ज्योतिष में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा को विवाह संबंधी बाधाओं के लिए शुभ माना जाता है.
मनचाही नौकरी या रोजगार की इच्छा रखने वाले लोग शिवरात्रि पर शिवलिंग का जल से अभिषेक करें. इसके बाद शिव मंदिर में 11 घी के दीपक जलाकर भगवान शिव से अपनी इच्छा पूरी होने की प्रार्थना करें.
स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए शिवलिंग पर इत्र अर्पित करने के बाद जल चढ़ाएं. इसके बाद मंदिर में बैठकर ‘ॐ जूं सः माम पालय पालय’ मंत्र का 11 माला जाप करने की मान्यता है. संभव हो तो इस दिन रुद्राक्ष धारण भी कर सकते हैं.
नोट: ये उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं.