कहा जाता है कि परछाई हमारा साथ कभी नहीं छोड़ती. लेकिन ये पूरी तरह से सच नहीं है. साल में ऐसा दिन भी आता है, जब दोपहर में कुछ समय के लिए हमारी परछाई भी हमारा साथ छोड़ देती है. इसको लाहैना नून कहा जाता है. चलिए आपको उस समय के बारे में बताते हैं, जब परछाई भी साथ छोड़ देती है.
क्या है लाहैना नून?
लाहैना नून एक खगोलीय घटना है. इसे जीरो शैडो डे भी कहते हैं. यह तब होता है, जब सूर्य आकाश में ठीक सिर के ऊपर होता है. यानी कि सूर्य 90 डिग्री पर होता है. इसकी वजह से इंसानों से लेकर पेड़ों तक की परछाई जमीन पर नहीं दिखाई देती है.
कब होता है लाहैना नून?
लाहैना नून साल में सिर्फ 2 बार होता है. एक बार मई महीने में और दूसरी बार जुलाई में होता है. ये घटना दोपहर में 12 बजकर 16 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट के बीच होती है.
धरती के 23.5 डिग्री के झुकाव की वजह से सूर्य 23.5 डिग्री त जाकर वापस आता है. इस दौरान विषवुत रेखा से कर्क रेखा तक सूर्य के जाते समय और वापस कर्क रेखा से विषुवत तक आते समय दो बार ऐसा मौका आता है, जब पेड़-पौधे, इंसान, मकान सबकी परछाई गायब हो जाती है.
क्या हर साल होता है लाहैना नून?
लाहैना नून हर साल दो बार होता है. एक मई के अंत और एक जुलाई के मध्य में होता है.
क्या हर दिखाई देता है लाहैना नून?
लाहैना नून हर साल होता है. लेकिन क्या ये दुनिया में हर जगह दिखाई देता है? नहीं, लाहैना नून हर जगह नहीं दिखाई देता है. भारत, दक्षिणपूर्व एशिया, मध्य अमेरिका और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देता है. कुदरत का ये करिश्मा कर्क रेखा से ऊपर रहने वाले लोगों को देखने को नहीं मिलता है.
इस साल कब होगा लाहैना नून-
माना जा रहा है कि 18 मई से 31 मई के बीच कई दिन लाहैना नून अलग-अलग जगहों पर होंगे. 18 मई को हवाई में दुर्लभ लाहैना नून की घटना हुई. इस दौरान लोगों की परछाई पूरी तरह से गायब हो गई. 24 मई को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर काहुलुई माउई हो सकता है.
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