बरमूडा ट्रायंगल एक ऐसी जगह है जिसका नाम सुनते ही जहाजों के गायब होने, विमानों के लापता होने और रहस्यमयी घटनाओं की कहानियां दिमाग में आने लगती हैं. दशकों से इसे दुनिया की सबसे रहस्यमयी जगहों में गिना जाता रहा है. कहा जाता है कि जो भी यहां पहुंचा, वह कभी वापस नहीं लौटा. लेकिन क्या सच में ऐसा है?
बरमूडा ट्रायंगल अटलांटिक महासागर का वह इलाका है, जो अमेरिका के फ्लोरिडा, बरमूडा और प्यूर्टो रिको के बीच है. 20वीं सदी के बीच में इस जगह ने दुनिया का ध्यान तब खींचा, जब यह दावा किया गया कि यहां जहाज और विमान रहस्यमय तरीके से गायब हो जाते हैं.
1945 की एक घटना ने दुनिया को चौंका दिया
इस रहस्य को सबसे ज्यादा हवा 1945 में मिली. अमेरिकी नौसेना के पांच विमान ट्रेनिंग मिशन पर निकले थे. इस मिशन को फ्लाइट-19 कहा जाता है. उड़ान के दौरान पायलटों का संपर्क टूट गया और इसके बाद वे कभी नहीं मिले. उन्हें खोजने गया एक रेस्क्यू विमान भी रास्ते में गायब हो गया. इसके बाद बरमूडा ट्रायंगल का नाम दुनिया भर में फैल गया और हर नई दुर्घटना को इसी रहस्य से जोड़कर देखा जाने लगा.
एलियंस से लेकर टाइम ट्रैवल तक... क्या-क्या नहीं कहा गया
समय के साथ बरमूडा ट्रायंगल को लेकर कई हैरान करने वाले दावे सामने आए. किसी ने कहा कि यहां डूबी हुई प्राचीन सभ्यता अटलांटिस की कोई रहस्यमयी तकनीक आज भी काम कर रही है. कुछ लोगों ने इसे एलियंस का अड्डा बताया. वहीं कई लोगों का मानना था कि यहां स्पेस-टाइम वॉर्प यानी ऐसा रास्ता है, जहां पहुंचकर जहाज और विमान किसी दूसरी दुनिया में चले जाते हैं.
कुछ वैज्ञानिकों ने समुद्र की गहराई से निकलने वाली मीथेन गैस के बड़े बुलबुलों को भी जिम्मेदार बताया. दावा था कि ये बुलबुले पानी का घनत्व कम कर देते हैं, जिससे जहाज अचानक डूब सकते हैं.
तो फिर असली वजह क्या हो सकती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस इलाके में अक्सर तेज तूफान और हरिकेन आते हैं. पुराने समय में मौसम की सटीक जानकारी नहीं मिलती थी, इसलिए जहाज और विमान खराब मौसम में फंस जाते थे. कुछ रिसर्च में यह भी कहा गया कि यहां कई बार 30 मीटर तक ऊंची वेव्स यानी अचानक उठने वाली विशाल लहरें बन सकती हैं, जो बड़े जहाजों को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं. हालांकि अब तक यह साबित नहीं हो पाया कि ऐसी लहरें बरमूडा ट्रायंगल में ही बनती हैं.
क्या पूरी कहानी सिर्फ झूठ पर टिकी है?
1975 में लेखक लैरी कुशे ने इस पूरे रहस्य की गहराई से जांच की. उन्होंने पाया कि बरमूडा ट्रायंगल से जुड़ी कई घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था. कुछ मामलों में जानकारी अधूरी थी, तो कुछ घटनाएं कभी हुई ही नहीं थीं, जैसा बताया गया. उनकी पड़ताल में यह भी सामने आया कि इस इलाके में दुर्घटनाओं की संख्या दुनिया के दूसरे व्यस्त समुद्री इलाकों से ज्यादा नहीं है.