अब गर्भ से बाहर पलेगा भ्रूण! खयाल रखेगी AI वाली दाई

चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज की सहायक कंपनी सूज़ौ इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में प्रोफेसर सन हाइक्सुआन के नेतृत्व में टीम ने कहा कि कृत्रिम गर्भ, या "लॉन्ग टर्म इम्ब्रायो कल्चर डिवाइस", मूल रूप से एक कंटेनर है जहां चूहे के भ्रूण पौष्टिक तरल पदार्थों से भरे क्यूब्स की एक पंक्ति में बढ़ रहे हैं.

Artificial Intelligence Embryo Care Device
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 03 फरवरी 2022,
  • अपडेटेड 12:17 PM IST
  • फिलहाल जानवरों के भ्रूण की देखभाल कर रही है ये एआई 
  • प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं को हल करने में मदद करेगी ये तकनीक

आपने हॉलीवुड फिल्मों में रोबोट को घर वालों की जरूरतों का ख्याल रखते देखा होगा. कुछ ऐसा ही चीन में होने वाला है. लेकिन इसमें नई बात ये है कि इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एक भ्रूण का ख्याल रखा जाएगा. जी हां, चीनी शोधकर्ताओं ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नैनी विकसित करने का दावा किया है, जो भ्रूण की निगरानी और देखभाल कर सकती है. यह एआई सिस्टम सूज़ौ के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित किया गया है, जो चीन के पूर्वी जिआंगसू प्रांत में स्थित है.

फिलहाल जानवरों के भ्रूण की देखभाल कर रही है ये एआई 

अध्ययन के निष्कर्ष पिछले महीने डोमेस्टिक पीयर-रिव्यू जर्नल ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में प्रकाशित हुए हैं. शोधकर्ताओं ने कहा कि यह एआई फिलहाल बड़ी संख्या में जानवरों के भ्रूण की देखभाल कर रही है. चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज की सहायक कंपनी सूज़ौ इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में प्रोफेसर सन हाइक्सुआन के नेतृत्व में टीम ने कहा कि कृत्रिम गर्भ, या "लॉन्ग टर्म इम्ब्रायो कल्चर डिवाइस", मूल रूप से एक कंटेनर है जहां चूहे के भ्रूण पौष्टिक तरल पदार्थों से भरे क्यूब्स की एक पंक्ति में बढ़ रहे हैं.

प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं को हल करने में मदद करेगी ये तकनीक 

यह सफलता कम जन्म दर का सामना कर रहे देश में बच्चे के जन्म के भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सकती है. क्योंकि शोध पत्र के अनुसार भ्रूण उसके शरीर के बाहर सुरक्षित और कुशलता से विकसित हो सकता है. एआई तकनीक मशीन को भ्रूण में परिवर्तन के सबसे छोटे संकेतों का पता लगाने और परिवर्तन करने में भी मदद करती है. उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी न केवल जीवन की उत्पत्ति और मनुष्यों के भ्रूण के विकास को समझने में मदद करेगी, बल्कि जन्म दोषों और अन्य प्रमुख प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं को हल करने के लिए एक सैद्धांतिक आधार भी प्रदान करेगी.


 

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