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महिला के शरीर में लगाई सूअर की किडनी, 9 महीने तक नहीं पड़ी डायलिसिस की जरूरत, अब इंसानों पर ट्रायल की तैयारी

इस प्रयोग से जुड़े एक अन्य मरीज टिम एंड्रयूज को 25 जनवरी 2025 को सूअर की किडनी लगाई गई थी. उन्हें डायबिटीज की वजह से किडनी फेलियर था और बताया गया था कि इंसान की किडनी मिलने में 7 साल तक लग सकते हैं. सूअर की किडनी ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया. हालांकि 14 दिन बाद उनके शरीर ने किडनी को खारिज करने की कोशिश की.

Pig kidney
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 04 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:32 PM IST

अमेरिका में मेडिकल साइंस से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. एक महिला के शरीर में जेनेटिकली बदली गई सूअर की किडनी लगाई गई थी. यह किडनी अब तक 9 महीने से ज्यादा समय तक काम कर चुकी है. इस दौरान महिला को डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ी. इसे दुनिया में अब तक का सबसे लंबा सफल मामला बताया जा रहा है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में जानवरों के अंग इंसानों के लिए किडनी की कमी को दूर करने में मदद कर सकते हैं.

22 नवंबर 2025 को हुई थी सर्जरी
अमेरिका के मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में 22 नवंबर 2025 को महिला की सर्जरी हुई थी. 3 सितंबर 2026 तक उसके शरीर में लगी सूअर की किडनी 285 दिन काम कर चुकी थी. महिला अभी भी इस मेडिकल स्टडी का हिस्सा है. वह उन 5 मरीजों में शामिल है, जिन्हें मार्च 2024 से अब तक प्रयोग के तौर पर eGenesis कंपनी की तैयार की गई सूअर की किडनी लगाई गई है. कंपनी के मुताबिक, इनमें से 3 मरीज 8 महीने से ज्यादा समय तक बिना डायलिसिस के रहे. दो मरीजों को बाद में इंसान की किडनी भी मिल गई. 

आपको बता दें, जिन लोगों की किडनी काम करना बंद कर देती है, उन्हें शरीर से गंदगी और अतिरिक्त पानी निकालने के लिए डायलिसिस कराना पड़ता है. आमतौर पर मरीजों को सप्ताह में करीब 3 बार अस्पताल या सेंटर जाना पड़ता है और हर बार लगभग 4 घंटे मशीन से जुड़ना पड़ता है. अगर किसी मरीज को सूअर की किडनी कुछ महीनों तक ठीक से काम करती रहती है, तो वह डायलिसिस से बच सकता है. इससे उसे तब तक राहत मिल सकती है, जब तक इंसान की किडनी का डोनर नहीं मिल जाता.

एक मरीज को 271 दिन तक मिली राहत
इस प्रयोग से जुड़े एक अन्य मरीज टिम एंड्रयूज को 25 जनवरी 2025 को सूअर की किडनी लगाई गई थी. उन्हें डायबिटीज की वजह से किडनी फेलियर था और बताया गया था कि इंसान की किडनी मिलने में 7 साल तक लग सकते हैं. सूअर की किडनी ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया. हालांकि 14 दिन बाद उनके शरीर ने किडनी को खारिज करने की कोशिश की. डॉक्टरों ने दवाओं में बदलाव कर स्थिति को संभाल लिया. यह किडनी 271 दिन तक काम करती रही. बाद में एंड्रयूज को बैक्टीरियल इंफेक्शन हुआ. संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए उनकी इम्यूनिटी दबाने वाली दवाएं कम करनी पड़ीं. इसके बाद किडनी में सूजन और छोटी नसों में खून के थक्के बनने लगे. आखिरकार अक्टूबर 2025 में इसे निकालना पड़ा. लेकिन इसके बाद भी प्रयोग की सबसे अहम बात सामने आई. जनवरी 2026 में एंड्रयूज को एक मृत इंसानी डोनर की किडनी मिल गई और वह किडनी अच्छी तरह काम करने लगी. डॉक्टरों को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि पहले सूअर की किडनी लगने से उनका शरीर इंसानी किडनी को स्वीकार करने में अड़चन पैदा कर रहा था.

सूअर की किडनी को इंसानों के लिए कैसे बदला गया?
साधारण सूअर की किडनी इंसान के शरीर में नहीं लगाई जा सकती, क्योंकि हमारा इम्यून सिस्टम उसे तुरंत बाहरी चीज समझकर हमला कर सकता है. इसलिए वैज्ञानिकों ने सूअर के जीन में बड़े बदलाव किए हैं. eGenesis की किडनी में कुल 69 जेनेटिक बदलाव किए गए हैं. वैज्ञानिकों ने ऐसे 3 सूअर के जीन हटाए, जो इंसानी शरीर में तुरंत इम्यून रिएक्शन पैदा कर सकते हैं. इसके अलावा 7 इंसानी जीन जोड़े गए, ताकि शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया, सूजन और खून जमने जैसी समस्याओं को नियंत्रित किया जा सके.

अभी आम मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं
हालांकि इसे बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन अभी सूअर की किडनी को आम मरीजों में इस्तेमाल करने की मंजूरी नहीं मिली है. अभी तक सिर्फ 5 मरीजों पर यह प्रयोग हुआ है, इसलिए इससे लंबे समय तक मिलने वाले फायदे और जोखिम के बारे में पक्की जानकारी नहीं है. जानवर के अंग से इंसान में संक्रमण फैलने का खतरा भी रहता है. इसलिए इन मरीजों की लगातार निगरानी की जाती है.

2027 से शुरू होगा बड़ा ट्रायल
अमेरिकी FDA ने eGenesis को RESTORE नाम का बड़ा क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की अनुमति दी है. इसमें 50 से 70 साल की उम्र के 33 किडनी मरीज शामिल किए जाएंगे. इन सभी को डायलिसिस की जरूरत होगी और वे इंसानी किडनी के इंतजार में होंगे.


 

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