इंसानों की आवाज समझकर दिशा पहचान लेती हैं बकरियां, क्या जानवर भी इंसानों की आवाज से 'इशारा' समझ सकते हैं?

अब तक यह क्षमता चिंपांजी में नहीं देखी गई थी, लेकिन कुत्तों में इसकी पुष्टि हो चुकी है. इसलिए वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि क्या यह क्षमता पालतू बनाने से जुड़ी हो सकती है.

animal behavior (File Photo: ITG)
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:01 PM IST

हम अक्सर सोचते हैं कि इंसानों की भाषा और समझ सिर्फ इंसानों तक सीमित है. लेकिन एक नई वैज्ञानिक रिसर्च ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है. नई रिसर्स के मुताबिक बकरियां इंसानों की आवाज के संकेत को समझकर सही दिशा में रखे गए खाने को ढूंढ सकती हैं. यह क्षमता पहले छोटे बच्चों और कुत्तों में देखी गई थी, लेकिन अब बकरियों में भी इसके संकेत मिले हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख में हुआ अध्ययन
यह अध्ययन स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया. रिसर्च के सीनियर लेखक प्रोफेसर साइमन टाउनसेंड के अनुसार, यह वोकल पॉइंटिंग का एक उदाहरण है, यानी आवाज के जरिए किसी दिशा का संकेत देना. अब तक यह क्षमता चिंपांजी में नहीं देखी गई थी, लेकिन कुत्तों में इसकी पुष्टि हो चुकी है. इसलिए वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि क्या यह क्षमता पालतू बनाने से जुड़ी हो सकती है.

कैसे किया गया प्रयोग?
रिसर्च में वैज्ञानिकों ने एक लकड़ी के स्क्रीन के दोनों तरफ दो बाल्टियां रखीं. पहले बकरियों को इस सेटअप की आदत डालने के लिए बार-बार बुलाकर एक बाल्टी में खाना दिखाया गया. इसके बाद असली टेस्ट शुरू हुआ. एक शोधकर्ता स्क्रीन के पीछे छिपकर बिना बकरियों को दिखाए एक बाल्टी में कच्चा पास्ता रखता था. फिर दोनों बाल्टियों को फिर से सामने रखा जाता था. अब शोधकर्ता अलग-अलग तरीकों से संकेत देता था. कभी वह खाली बाल्टी के पास खड़ा होकर दूसरी तरफ उत्साहित आवाज़ में संकेत देता, कभी पूरी तरह चुप रहता और कभी ऐसी दिशा में बोलता जहां दोनों बाल्टियों से उसका रुख अलग होता. इसके बाद बकरियों को छोड़ा जाता था और उनके व्यवहार को रिकॉर्ड किया जाता था.

क्या निकला नतीजा?
कुल 29 बकरियों पर 12-12 ट्रायल किए गए. जब शोधकर्ता ने सही दिशा में आवाज दी, तब बकरियों ने 60% मामलों में सही बाल्टी चुनी. जब कोई आवाज नहीं दी गई, तो सफलता दर 47% रही. और जब आवाज गलत दिशा में थी, तब भी परिणाम लगभग 49% रहा. इससे साफ हुआ कि बकरियां इंसानों की आवाज की दिशा को समझकर सही विकल्प चुनने में सक्षम हैं.

क्या यह सीखने से आता है या जन्मजात क्षमता है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह क्षमता सिर्फ ट्रेनिंग का नतीजा नहीं है. बल्कि यह एक प्राकृतिक समझ हो सकती है, जो कुछ जानवरों में इंसानों के साथ रहने के कारण विकसित हुई है. शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि अगर यही प्रयोग जंगली बकरियों पर किया जाए तो और भी रोचक परिणाम मिल सकते हैं.

क्यों अहम है यह खोज?
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह रिसर्च सिर्फ जानवरों की समझ नहीं, बल्कि मानव-जानवर संबंधों को भी बेहतर समझने में मदद करती है. इससे यह पता चलता है कि जानवर भी इंसानों के संकेतों को काफी हद तक समझ सकते हैं.

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