बस चेहरे का होगा स्कैन और पकड़ में आ जाएगी दिल की बीमारियां...हेल्थ की मॉनिटरिंग होगी आसान

दिल की बीमारी के शुरुआती संकेत अक्सर धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और गलत जीवनशैली से जुड़े होते हैं. आमतौर पर डॉक्टर इन जोखिमों का अंदाजा लक्षणों और रिपोर्ट्स के आधार पर लगाते हैं.

Early cardiovascular risk detection
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:29 PM IST
  • क्या है Fast-RSOM स्किन स्कैन?
  • इलाज और बचाव में कैसे मदद मिलेगी?

दिल की बीमारी अक्सर तब पकड़ में आती है, जब नुकसान काफी हो चुका होता है. लेकिन अब जर्मनी के वैज्ञानिकों ने ऐसी नई इमेजिंग तकनीक बनाई है, जो बिना सुई-चीरफाड़ के सिर्फ स्किन को स्कैन कर दिल की बीमारी के शुरुआती खतरे का पता लगा सकती है. इस तकनीक का नाम है फास्ट-RSOM. इस रिसर्च को इंटरनेशनल जर्नल Light: Science & Applications में पब्लिश किया गया है.

क्या है Fast-RSOM स्किन स्कैन?
फास्ट-RSOM एक नॉन-इनवेसिव तकनीक है, यानी इसमें शरीर के अंदर कोई डिवाइस नहीं डाला जाता. यह स्किन के जरिए शरीर की बेहद छोटी ब्लड वेसल्स की हाई-रिजॉल्यूशन 3D तस्वीरें बनाती है. यह तकनीक इतनी संवेदनशील है कि उन बदलावों को भी पकड़ लेती है, जो सामान्य स्कैन या टेस्ट में दिखाई नहीं देते.

किस समस्या को पहचानता है यह स्कैन?
फास्ट-RSOM खासतौर पर माइक्रोवैस्कुलर एंडोथीलियल डिसफंक्शन (MiVED) को पहचान सकती है. यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बहुत बारीक ब्लड वेसल्स ठीक से फैल और सिकुड़ नहीं पातीं. यही बदलाव आगे चलकर दिल की गंभीर बीमारियों की वजह बनते हैं. अब तक इंसानों में इन शुरुआती बदलावों को न तो ठीक से देखा जा सकता था और न ही मापा जा सकता था. फास्ट-RSOM की मदद से पहली बार इसे देखा जा सकेगा. 

क्यों है यह खोज अहम?
दिल की बीमारी के शुरुआती संकेत अक्सर धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और गलत जीवनशैली से जुड़े होते हैं. आमतौर पर डॉक्टर इन जोखिमों का अंदाजा लक्षणों और रिपोर्ट्स के आधार पर लगाते हैं. लेकिन फास्ट-RSOM सीधे यह दिखा सकता है कि इन कारणों ने रक्त नलिकाओं पर कितना असर डाला है वो भी बीमारी के लक्षण आने से बहुत पहले.

इलाज और बचाव में कैसे मदद मिलेगी?
इस तकनीक से डॉक्टर ज्यादा सटीक तरीके से यह पहचान सकेंगे कि किस व्यक्ति को भविष्य में दिल का दौरा या दिल की दूसरी बीमारियां होने का खतरा ज्यादा है. साथ ही यह भी देखा जा सकेगा कि लाइफस्टाइल बदलने या दवाइयों का असर शरीर पर कितना हो रहा है. इससे इलाज को हर मरीज के हिसाब से पर्सनलाइज किया जा सकेगा.

कैसे काम करती है RSOM तकनीक?
RSOM तकनीक में त्वचा पर हल्की रोशनी की पल्स डाली जाती है. इससे शरीर के अंदर अल्ट्रासाउंड सिग्नल बनते हैं, जिनकी मदद से त्वचा के नीचे मौजूद संरचनाओं की बेहद साफ और डिटेल्ड तस्वीरें तैयार होती हैं.


 

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