दुनिया भर में वैज्ञानिक लंबे समय से ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जो इंसान को ज्यादा समय तक हेल्दी रख सकें. इस बीच रूस सरकार ने करीब 26 अरब डॉलर (लगभग 2.47 लाख करोड़ रुपए) की लागत से एक बड़ा वैज्ञानिक मिशन शुरू किया है, जिसका मकसद उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करना और लोगों को लंबे समय तक स्वस्थ जीवन देना है.
क्या है रूस का नया प्रोजेक्ट?
रूस ने इस पहल को 'न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज' नाम दिया है. सरकारी दावों के मुताबिक, इस परियोजना के जरिए ऐसी तकनीकें विकसित की जाएंगी जो उम्र बढ़ने की रफ्तार को कम कर सकें. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर कोशिकाओं और अंगों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सके तो कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव होगा और इंसान की उम्र भी बढ़ सकती है.
किन तकनीकों पर हो रहा काम?
इस प्रोजेक्ट में कई आधुनिक तकनीकों पर शोध किया जा रहा है.
जीन थेरेपी के जरिए डीएनए में बदलाव कर उम्र बढ़ने और कुछ बीमारियों को नियंत्रित करने की कोशिश की जाएगी.
3D बायोप्रिंटिंग तकनीक की मदद से लैब में मानव अंग और ऊतक (टिश्यू) तैयार किए जा सकते हैं. भविष्य में खराब अंगों को बदलने में यह तकनीक बड़ी भूमिका निभा सकती है.
पेप्टाइड थेरेपी में ऐसे विशेष कंपाउंड का उपयोग किया जाता है, जो शरीर की कोशिकाओं को बेहतर तरीके से काम करने के संकेत देते हैं.
वहीं क्रायोथेरेपी में अत्यंत कम तापमान का इस्तेमाल कर कोशिकाओं पर पड़ने वाले असर का अध्ययन किया जा रहा है.
क्या सचमुच लैब में बनेंगे नए अंग?
वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में 3D बायोप्रिंटिंग के जरिए कृत्रिम अंगों के निर्माण में बड़ी प्रगति हो सकती है. यदि यह तकनीक सफल होती है तो किडनी, लिवर या अन्य अंगों की खराबी से जूझ रहे मरीजों को नया विकल्प मिल सकता है. हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती और विकासशील चरण में है. इसलिए इसे आम लोगों तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है.
150 साल तक जीने की चर्चा क्यों?
रूस और चीन के शीर्ष नेताओं के बीच हुई चर्चाओं के बाद यह विषय सुर्खियों में आया था कि भविष्य में इंसान की उम्र काफी बढ़ सकती है. कुछ वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि अगर चिकित्सा तकनीकों में तेजी से प्रगति हुई तो इस सदी के अंत तक औसत जीवनकाल में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
ये भी पढ़ें