शायद ही दुनिया में कोई ऐसा देश होगा, जहां मच्छरों ने लोगों की नींद न उड़ाई हो। कभी रात की नींद खराब करते हैं, तो कभी बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पहले के मुकाबले अब मच्छर इंसानों को ज्यादा क्यों काटने लगे हैं? वैज्ञानिकों की नई रिसर्च बताती है कि मच्छरों का इंसानों का काटना इत्तेफाक नहीं है.
ब्राजील के जंगलों में किया गया अध्ययन
ब्राजील में हुई एक नई रिसर्च में सामने आया है कि जैसे-जैसे बायोडायवर्सिटी में कमी आ रही है, मच्छर इंसानों के खून पर ज्यादा निर्भर होते जा रहे हैं. यानी जंगल उजड़े, जानवर कम हुए और मच्छरों ने इंसानों को अपना आसान शिकार बना लिया. फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ रियो डी जनेरियो और ओसवाल्डो क्रूज इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने लाइट ट्रैप की मदद से मच्छरों को पकड़ा. इस दौरान 52 अलग-अलग प्रजातियों के करीब 1700 मच्छर इकट्ठा किए गए.
ऐसे की गई रिसर्च
शोधकर्ताओं ने उन मादा मच्छरों को अलग किया, जिनके शरीर में खून भरा हुआ था. इनमें से 24 मच्छरों में खून का डीएनए पहचानने लायक मिला. हैरानी की बात यह रही कि इनमें 18 अलग-अलग इंसानों का खून पाया गया. इसके बाद पक्षियों का नंबर आया, जिनके खून के नमूने सिर्फ 6 मामलों में मिले. वहीं मेंढक, चूहे और जंगली कुत्तों का खून सिर्फ एक-एक बार ही मिला.
क्यों बढ़ रही है इंसानों पर निर्भरता
वैज्ञानिकों के मुताबिक, जंगल के बचे-खुचे हिस्सों में भी मच्छर इंसानों को प्राथमिकता दे रहे हैं. जंगलों की कटाई के कारण जानवर कम हो गए हैं, जबकि इंसानों की संख्या बढ़ी है. ऐसे में मच्छर मजबूरी में इंसानों को ही अपना भोजन बना रहे हैं.
स्वास्थ्य के लिए क्यों खतरनाक है यह बदलाव
यह बदलाव सिर्फ मच्छर काटने तक सीमित नहीं है. मच्छर कई खतरनाक बीमारियों जैसे डेंगू, मलेरिया और जीका के वाहक होते हैं. अगर वे ज्यादा इंसानों को काटेंगे, तो बीमारियों के फैलने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाएगा. यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे एक गंभीर चेतावनी मान रहे हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि मच्छर पकड़ने के तरीकों में सुधार की जरूरत है. यह रिसर्च जर्नल Frontiers in Ecology and Evolution में प्रकाशित हुई है.