Advertisement

जूडो में भारत का गोल्डन धमाका! 30 मिनट में अस्मिता और हर्ष सिंह ने जीते दो गोल्ड, बढ़ाया देश का मान

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जूडो ने इतिहास रच दिया है. महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में अस्मिता दे के स्वर्ण पदक जीतने के कुछ ही देर बाद पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में हर्ष सिंह ने भी गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया.

Harsh Singh and Asmita Dey win historic judo golds
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:55 PM IST

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जूडो ने इतिहास रच दिया है. महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में अस्मिता दे के स्वर्ण पदक जीतने के कुछ ही देर बाद पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में हर्ष सिंह ने भी गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया. एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय खिलाड़ियों ने राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो के इतिहास का नया अध्याय लिख दिया और दशकों से चला आ रहा गोल्ड का इंतजार खत्म कर दिया.

हर्ष सिंह ने फाइनल में दिखाया दम
पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में हर्ष सिंह का प्रदर्शन पूरी तरह शानदार रहा. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को एकतरफा मुकाबले में 10-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. मुकाबले की शुरुआत से ही हर्ष आक्रामक अंदाज में नजर आए. उनके बेहतरीन दांव-पेच और संतुलन के सामने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी टिक नहीं सका. इस जीत ने भारतीय खेल प्रेमियों को जश्न मनाने का एक और बड़ा मौका दिया.

अस्मिता दे के बाद आया दूसरा गोल्ड
इससे पहले महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में अस्मिता दे ने गोल्डन स्कोर के जरिए 2-1 से जीत दर्ज कर भारत को राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में जूडो का पहला स्वर्ण पदक दिलाया था. उनकी ऐतिहासिक सफलता के कुछ ही समय बाद हर्ष सिंह ने भी गोल्ड जीतकर भारत के लिए डबल खुशी का मौका बना दिया.

दशकों का इंतजार हुआ खत्म
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय जूडो का सफर लंबे समय तक संघर्ष भरा रहा. इससे पहले भारत ने जूडो में 5 रजत और 6 कांस्य पदक जीते थे, लेकिन स्वर्ण पदक का सपना अधूरा था. कई भारतीय खिलाड़ी फाइनल तक पहुंचे, लेकिन गोल्ड नहीं जीत सके. अस्मिता दे और हर्ष सिंह ने आखिरकार इस लंबे इंतजार को खत्म कर इतिहास रच दिया.

भारतीय जूडो के लिए नई शुरुआत
एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय जूडो टीम ने दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराया है. यह उपलब्धि केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में जूडो और अन्य कॉम्बैट स्पोर्ट्स को नई पहचान देने वाली भी मानी जा रही है. अस्मिता दे और हर्ष सिंह की यह सफलता आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और भारतीय खेलों के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी.

ये भी पढ़ें: 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement