हरियाणा के सोनीपत की हॉकी का जलवा अब विश्व मंच पर दिखाई दे रहा है. एक परिवार के ही तीन लोग भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रह चुके हैं. माता-पिता पहले हॉकी खेलते थे तो अब बेटे ने भी भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा बनने का सपना पूरा किया. नीदरलैंड्स में हो रहे हॉकी वर्ल्ड कप में सोनीपत के तीन खिलाड़ी सुमित, अभिषेक नैन और यशदीप सिवाच भारत की टीम का हिस्सा हैं. वहीं चार महिला खिलाड़ी भी वर्ल्ड कप में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. खास बात ये है कि यशदीप सिवाच की मां प्रीतम सिवाच खुद भारतीय हॉकी टीम की कप्तान रह चुकी हैं. यशदीप शिवाजी के पिता भी हॉकी खिलाड़ी रह चुके हैं और अब बतौर रेलवे में जॉब कर रहे हैं. आज भी वह खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए बारिश हो या कोई पारिवारिक कार्यक्रम, मैदान पहुंचना नहीं छोड़तीं.
हॉकी टीम में सोनीपत के 3 खिलाड़ी-
सोनीपत की हॉकी ने एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है. नीदरलैंड्स में हो रहे वर्ल्ड कप में सोनीपत के सुमित, अभिषेक नैन और यशदीप सिवाच भारतीय टीम के साथ मैदान में हैं. वहीं सोनीपत की चार महिला खिलाड़ी भी विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं.
यशदीप सिवाच के वर्ल्ड कप खेलने से उनकी मां और पूर्व भारतीय कप्तान प्रीतम सिवाच बेहद खुश हैं. प्रीतम खुद आज भी मैदान में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देती हैं. उनका कहना है कि मौसम कोई भी हो, खिलाड़ियों की मेहनत रुकनी नहीं चाहिए.
बेटा पूरा करे मेरा सपना- पूर्व कप्तान प्रीतम
प्रीतम सिवाच ने कहा कि बारिश में भी मैं ग्राउंड में आती हूं. मेरा पहला प्यार हॉकी है और मेरा सपना है कि इस ग्राउंड से देश के लिए और ओलंपिक के लिए खिलाड़ी निकलें. प्रीतम सिवाच बताती हैं कि उनके अपने भी हॉकी से जुड़े सपने थे, लेकिन कुछ सपने पूरे नहीं हो पाए. अब वह चाहती हैं कि उनका बेटा यशदीप और ग्राउंड में मेहनत करने वाले दूसरे खिलाड़ी उनके अधूरे सपनों को पूरा करें.
धीरे-धीरे हॉकी की तरफ बढ़ा यशदीप का रुझान- प्रीतम
यशदीप के खेल सफर की शुरुआत भी घर के हॉकी माहौल से हुई. प्रीतम बताती हैं कि यशदीप स्कूल में पढ़ाई के साथ दूसरे खेलों में भी हिस्सा लेता था. परिवार ने हमेशा उसे पढ़ाई के साथ खेलों को भी जरूरी बताया. धीरे-धीरे उसका रुझान हॉकी की तरफ बढ़ा और आज वह भारतीय टीम के साथ वर्ल्ड कप खेल रहा है. मैंने कभी भी परिवार और दोस्तों के फंक्शन भी अटेंड नहीं किया. सबसे पहले मैं ग्राउंड में पहुंचती थी और बाद में परिवार और दोस्तों को टाइम देती थी. मेरे लिए सबसे पहले मेरी प्राथमिकता मेरे ग्राउंड में आने वाले बच्चे हैं, जो मेरा इंतजार करते हैं.
जब यशदीप पेट में था, तब हॉकी का जुनून था- प्रीतम
प्रीतम बताती हैं कि यशदीप 9 महीने पेट में था तो मुझे हॉकी का जुनून था. उसे जुनून ने बेटे को भारतीय टीम का हिस्सा बना दिया. आज मैं बहुत खुश हूं कि बेटा भी भारतीय टीम में वर्ल्ड कप खेल रहा है और मेरे ग्राउंड से चार लड़कियां भारतीय टीम में खेल रही हैं. मैं हमेशा हो किसी से प्यार किया है और यह पूरा जीवन हॉकी पर लगा दिया है.
यशदीप के पिता भी रहे हैं हॉकी खिलाड़ी-
वहीं, प्रीतम सिवाच के साथ उनके पति कुलदीप सिवाच भी हॉकी से जुड़े रहे हैं. दोनों ने हॉकी को सिर्फ अपना खेल नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाया. प्रीतम जहां मैदान में बच्चों को हॉकी के गुर सिखाती हैं, वहीं कुलदीप ने भी इस सफर में उनका साथ दिया. कुलदीप सिवाच ने बताया कि उनके जो सपने अधूरे रह गए, अब वह चाहते है कि उनका बेटा यशदीप और उनके ग्राउंड से निकलने वाले दूसरे खिलाड़ी उन सपनों को पूरा करें. यही वजह है कि परिवार ने यशदीप को बचपन से ही खेल के माहौल में रखा और आज वही बेटा वर्ल्ड कप में भारत की जर्सी पहनकर मैदान में उतर रहा है. हमें अपने बेटे पर गर्व है, उसे वर्ल्ड कप में भारत की जर्सी में खेलते देख बहुत खुशी हो रही है.
(पवन कुमार की रिपोर्ट)
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