अमेरिका के Tampa में रहने वाली 33 साल की जॉर्डन राइचे के लिए एक नई तकनीक उम्मीद लेकर आई है. जॉर्डन बचपन से ही एक जेनेटिक बीमारी Retinitis Pigmentosa से जूझ रही हैं, जिसकी वजह से उनकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होती गई और 12 साल की उम्र में वो पूरी तरह से ब्लाइंड हो गईं.
कैसे काम करता है AI चश्मा
हाल ही में उन्हें Ray-Ban Meta Smart Glasses (AI ग्लासेस) मिले हैं, जो AI की मदद से सामने की दुनिया को आवाज में समझाते हैं. ये चश्मा चीजों और रंगों को पहचान सकता है, बोर्ड या साइन पढ़कर सुना सकता है और यहां तक कि मेन्यू या बिल भी पढ़ने में मदद करता है.
ये चश्मा मोबाइल फोन से ब्लूटूथ के जरिए जुड़ता है और इंटरनेट की मदद से काम करता है. अब जॉर्डन अपने घर पर रखी चिट्ठियां पढ़ सकती हैं और सामान की एक्सपायरी डेट भी चेक कर सकती हैं.
नई तकनीक से जिंदगी हुई आसान
जॉर्डन को ये चश्मा फ्लोरिडा की एक संस्था Dogs Inc. के पायलट प्रोग्राम के तहत मिला है. यह संस्था दृष्टिहीन लोगों को गाइड डॉग उपलब्ध कराती है और नई तकनीक से उनकी जिंदगी आसान बनाने की कोशिश करती है.
500 डॉलर है इस चश्मे की कीमत
जॉर्डन पहले भी इस चश्मे को एक स्टोर में आजमा चुकी थीं, लेकिन करीब 500 डॉलर की कीमत के कारण खरीद नहीं पाई थीं. अब उन्हें यह चश्मा मुफ्त में मिला है और वे इसे अपने रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल कर सकती हैं. जॉर्डन के साथ पिछले सात साल से उनका गाइड डॉग ब्लू भी है, जो उन्हें रास्तों और खतरों से बचाने में मदद करता है.