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क्यों नहीं होते iPhone में सारे ऐप एक साथ क्लोज? क्या है एप्पल का राज़..

हर बार सभी बैकग्राउंड ऐप्स बंद करना जरूरी नहीं होता. कई मामलों में यह आपके फोन की परफॉर्मेंस और बैटरी पर उल्टा असर डाल सकता है.

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क्या आपने कभी नोटिस किया है कि एप्पल के आईफोन में बैकग्राउंड में चल रहे सभी ऐप्स को एक साथ बंद करने के लिए 'क्लियर ऑल' जैसा कोई बटन नहीं दिया जाता? जबकि एंड्रॉयड फोन में यह फीचर लगभग हर डिवाइस में मिलता है. दरअसल यह एप्पल की कोई कमी या भूल नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है. कंपनी जानबूझकर आईफोन में ऐसा ऑप्शन नहीं देती, क्योंकि इसका सीधा असर फोन की परफॉर्मेंस, बैटरी और उसकी लंबी उम्र पर पड़ सकता है.

एप्पल का मानना है कि यूजर्स को बार-बार सभी ऐप्स बंद करने की जरूरत ही नहीं होती. यही कारण है कि आईफोन में आपको बैकग्राउंड ऐप्स को केवल एक-एक करके बंद करने का ऑप्शन मिलता है, लेकिन सभी ऐप्स को एक साथ क्लियर करने का बटन नहीं दिया जाता. कंपनी का मानना है कि अगर यूजर्स लगातार सभी ऐप्स बंद करते रहेंगे, तो इससे फोन के सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है.

बढ़ता है प्रोसेसर का काम
जब आप किसी ऐप को पूरी तरह बंद कर देते हैं और बाद में उसे दोबारा खोलते हैं, तो फोन के प्रोसेसर को उस ऐप को शुरू से लोड करना पड़ता है. इसके विपरीत अगर ऐप बैकग्राउंड में मौजूद रहता है, तो फोन उसे वहीं से तुरंत खोल देता है. इससे प्रोसेसर को कम मेहनत करनी पड़ती है और फोन की स्पीड बेहतर बनी रहती है. यही वजह है कि आईफोन लंबे समय तक स्मूद परफॉर्मेंस देने के लिए जाना जाता है.

बार-बार ऐप्स बंद करने के नुकसान
लगातार सभी बैकग्राउंड ऐप्स को बंद करने से फोन को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं. हर बार ऐप दोबारा खोलने पर प्रोसेसर को ज्यादा काम करना पड़ता है, जिससे फोन स्लो या हैंग होने लगता है. इसके अलावा प्रोसेसर पर अतिरिक्त दबाव पड़ने से बैटरी भी तेजी से खत्म होती है. यही कारण है कि कई बार महंगे फोन का भी यूजर एक्सपीरियंस खराब हो जाता है.

एंड्रॉयड और आईफोन में बड़ा फर्क
एंड्रॉयड स्मार्टफोन में 'क्लियर ऑल' बटन आसानी से मिल जाता है, इसलिए यूजर्स अक्सर एक क्लिक में सभी ऐप्स बंद कर देते हैं. वहीं आईफोन में यह विकल्प नहीं होने से यूजर्स अनावश्यक रूप से ऐप्स बंद करने से बच जाते हैं. एप्पल का यही डिजाइन फोन को लंबे समय तक स्मूद और बेहतर परफॉर्मेंस देने में मदद करता है.

किन ऐप्स को बैकग्राउंड में रहने दें
एक सामान्य यूजर दिनभर में वॉट्सऐप, यूट्यूब या इंस्टा जैसे ऐप्स कई बार खोलता है. ऐसे ऐप्स को बैकग्राउंड में रहने देना बेहतर होता है, क्योंकि इससे वे जल्दी खुलते हैं और फोन पर ज्यादा लोड नहीं पड़ता. वहीं जिन ऐप्स का इस्तेमाल कभी-कभार होता है, जैसे टिकट बुकिंग या किसी खास सर्विस के ऐप, उन्हें इस्तेमाल के बाद बंद करना ठीक रहता है.