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AI Location Tracking Threat: बिना GPS टैग किए भी पहचान ले रहा AI लोकेशन, स्टडी में सामने आया खौफनाक सच

सोशल मीडिया पर हम हर कुछ डाल देते हैं बिना जाने और समझे कि उसका परिणाम क्या होगा. नई स्टडी के मुताबिक AI बिना GPS या लोकेशन टैग के भी सोशल मीडिया फोटो से जगह पहचान सकता है, जो कि एक बड़ा खतरा बन कर उभर रहा है.

AI Location Tracking Study
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:03 PM IST

सोशल मीडिया पर फोटो या वीडियो शेयर करना आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है. छुट्टियों की तस्वीर हो या किसी नई जगह की फोटो, हम बिना ज्यादा सोचे उसे ऑनलाइन पोस्ट कर देते हैं. लेकिन अब एक नई स्टडी ने सोशल मीडिया यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर चिंता बढ़ा दी है. रिसर्च के मुताबिक, AI आपकी फोटो देखकर यह पता लगा सकता है कि तस्वीर कहां की है, वो भी तब जब फोटो में GPS या लोकेशन टैग जैसी जानकारी मौजूद न हो.

AI ने 9 में करीब 8-9 बार सही बताई लोकेशन
McAfee की स्टडी में AI मॉडल्स की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की गई कि बिना किसी लोकेशन डेटा के तस्वीर की जगह पहचानी जा सकती है या नहीं. स्टडी में AI ने कई तस्वीरों का शहर और देश सही पहचाना. इस टेस्ट में Google के Gemma 3 27B और Alibaba के Qwen 3 VL 30B मॉडल का इस्तेमाल किया गया. दोनों ओपन-वेट मॉडल हैं और इन्हें इस्तेमाल करने के लिए किसी सब्सक्रिप्शन की जरूरत नहीं है. स्टडी में 21,236 ट्रैवल तस्वीरों को शामिल किया गया. Gemma 3 27B ने 87 फीसदी मामलों में शहर और देश सही पहचाना, जबकि Qwen 3 VL 30B की सटीकता 91 फीसदी रही.

तस्वीर में मौजूद छोटी-छोटी चीजों से लगाता है अंदाजा
AI को तस्वीर की लोकेशन पता करने के लिए किसी GPS, EXIF डेटा, मेटाडेटा या फाइल नेम की जानकारी नहीं दी गई थी. तस्वीर के साथ सिर्फ एक साधारण सवाल पूछा गया कि यह फोटो कहां की है. इसके बाद AI ने तस्वीर के अंदर मौजूद चीजों को देखकर जगह पहचानने की कोशिश की. इसमें इमारतों की बनावट, साइन बोर्ड, शहर का स्काईलाइन, रोशनी, सड़क के निशान, दुकानों और यहां तक कि खाने के स्टॉल जैसी चीजें शामिल थीं.

स्टडी में यह भी सामने आया कि मशहूर टूरिस्ट स्पॉट या अलग पहचान रखने वाली जगहों की तस्वीरें AI के लिए पहचानना आसान था. वहीं समुद्र तट, गांव की सड़कें और होटल के कमरे जैसी तस्वीरों की लोकेशन बताना ज्यादा मुश्किल रहा. इसके बावजूद कई मामलों में AI देश की पहचान करने में सफल रहा.

निजी तस्वीरों से भी AI ने पहचान ली जगह
स्टडी से अलग McAfee के कर्मचारियों ने अपनी कुछ निजी ट्रैवल तस्वीरें भी ChatGPT, Claude और Copilot जैसे AI टूल्स पर डालकर उनसे लोकेशन पूछी. इनमें कुछ तस्वीरें ऐसी भी थीं, जिन्हें कभी सार्वजनिक तौर पर पोस्ट नहीं किया गया था. एक मामले में AI ने पेड़ों और नदी वाले एक सामान्य से दृश्य को भी अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य के छोटे से गांव Hastings-on-Hudson के रूप में पहचान लिया.

AI से स्कैमर्स को मिल सकती है नई मदद
स्टडी ने साइबर फ्रॉड को लेकर भी चिंता जताई है. कोई स्कैमर Instagram, Facebook या X जैसी साइटों से किसी व्यक्ति की सार्वजनिक ट्रैवल तस्वीरें लेकर AI की मदद से उसकी संभावित लोकेशन और यात्रा का समय पता कर सकता है.

इसके बाद वह उसी जगह का नाम लेकर ज्यादा भरोसेमंद दिखने वाला फर्जी मैसेज भेज सकता है. जैसे, यात्रा के दौरान बैंक अकाउंट में संदिग्ध गतिविधि या उसी जगह से लॉगिन की कोशिश का अलर्ट भेजना. मैसेज पूरी तरह सही होना जरूरी नहीं, बस इतना विश्वसनीय होना चाहिए कि सामने वाला उस पर भरोसा कर ले.

बढ़ते साइबर क्राइम के बीच बढ़ी चिंता
भारत में बढ़ते साइबर क्राइम के बीच यह खतरा और गंभीर हो सकता है. गृह मंत्रालय के मुताबिक, 2025 में साइबर अपराध के 28.15 लाख मामले दर्ज हुए, जबकि 2024 में यह संख्या 22.68 लाख थी. यानी एक साल में मामलों में 24 फीसदी बढ़ोतरी हुई. मंत्रालय के अनुसार, 2025 में साइबर अपराध के कारण भारतीयों को 22,495 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

इसलिए अगली बार सोशल मीडिया पर अपनी ट्रैवल फोटो डालने से पहले थोड़ा सावधान रहना जरूरी है. खासकर ऐसी तस्वीरों में जो किसी मशहूर जगह या आपकी यात्रा की लोकेशन को आसानी से पहचानने में मदद कर सकती हैं. हालांकि, अगर फोटो किसी खास लैंडमार्क के आसपास की नहीं है, तो AI के लिए आपकी बिल्कुल सटीक लोकेशन पहचानना उतना आसान नहीं हो सकता.
 

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