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कार में बिना तार कैसे चार्ज होता है मोबाइल? जानिए वायरलेस चार्जिंग के पीछे की पूरी टेक्नोलॉजी

कार में दिए गए खास चार्जिंग पैड पर फोन रखते ही चार्जिंग शुरू हो जाती है. लेकिन आखिर बिना तार के मोबाइल तक बिजली पहुंचती कैसे है? आइए आसान भाषा में समझते हैं.

phone charging
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 22 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:04 PM IST

आजकल कारों में कई ऐसे स्मार्ट फीचर्स दिए जा रहे हैं, जो सफर को आसान और सुविधाजनक बनाते हैं. इन्हीं में से एक है वायरलेस चार्जिंग. इसकी मदद से मोबाइल को बिना किसी केबल के चार्ज किया जा सकता है. कार में दिए गए खास चार्जिंग पैड पर फोन रखते ही चार्जिंग शुरू हो जाती है. लेकिन आखिर बिना तार के मोबाइल तक बिजली पहुंचती कैसे है? आइए आसान भाषा में समझते हैं.

वायरलेस चार्जिंग क्या है?
वायरलेस चार्जिंग में मोबाइल को चार्ज करने के लिए केबल लगाने की जरूरत नहीं होती. कार में एक खास चार्जिंग पैड दिया जाता है. इस पर सिर्फ वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट करने वाले फोन को रखना होता है. ज्यादातर सिस्टम में Qi जैसे वायरलेस चार्जिंग स्टैंडर्ड का इस्तेमाल किया जाता है.

मैग्नेटिक फील्ड से पहुंचती है पावर
वायरलेस चार्जिंग पैड के अंदर तांबे की एक खास Coil लगी होती है. जब चार्जिंग पैड को पावर मिलती है, तो इस Coil में तेजी से बदलने वाला इलेक्ट्रिक करंट बहता है. इससे एक बदलता हुआ मैग्नेटिक फील्ड बनता है. मोबाइल के अंदर भी इसी तरह की एक छोटी Coil लगी होती है. जब फोन को चार्जिंग पैड पर सही स्थिति में रखा जाता है, तो मोबाइल की Coil इस मैग्नेटिक फील्ड से ऊर्जा हासिल करती है. इसके बाद फोन का चार्जिंग सिस्टम इस ऊर्जा को इलेक्ट्रिक पावर में बदलकर बैटरी चार्ज करता है.

फोन को सही जगह रखना क्यों जरूरी?
वायरलेस चार्जिंग में मोबाइल की पोजिशन काफी महत्वपूर्ण होती है. अगर फोन और चार्जिंग पैड के अंदर लगी दोनों Coils सही तरीके से एक-दूसरे के सामने नहीं होंगी, तो चार्जिंग धीमी हो सकती है. कुछ ऊर्जा गर्मी में भी बदल सकती है. इसलिए कार के चार्जिंग पैड पर फोन रखने के लिए अक्सर एक निश्चित जगह या निशान दिया जाता है.

क्या हर फोन में यह सुविधा होती है?
नहीं, हर स्मार्टफोन वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट नहीं करता. इसके लिए फोन के अंदर जरूरी हार्डवेयर और वायरलेस चार्जिंग की सुविधा होनी चाहिए. साथ ही अलग-अलग फोन और चार्जिंग पैड की क्षमता अलग हो सकती है, इसलिए सभी डिवाइस एक जैसी स्पीड से चार्ज नहीं होते.

गर्म होने पर कम हो सकती है चार्जिंग स्पीड
अच्छे वायरलेस चार्जिंग सिस्टम में सुरक्षा के लिए तापमान और पावर को नियंत्रित करने की व्यवस्था होती है. अगर चार्जिंग के दौरान फोन बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है, तो सिस्टम चार्जिंग की स्पीड कम कर सकता है. इसलिए तेज धूप या बहुत गर्म माहौल में फोन को वायरलेस तरीके से चार्ज करने से बचना बेहतर है. कुल मिलाकर, कार की वायरलेस चार्जिंग तकनीक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन के जरिए काम करती है. चार्जिंग पैड मैग्नेटिक फील्ड बनाता है और मोबाइल की अंदरूनी Coil उस ऊर्जा को हासिल करके बैटरी चार्ज करती है. यानी बिना केबल लगाए ही बिजली मोबाइल की बैटरी तक पहुंच जाती है.

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