क्या चार्जर को हर समय प्लग में लगाए रखने से बिजली बिल ज्यादा आता है, चार्जर का सही इस्तेमाल कैसे करें? जानिए

हर चार्जर एक जैसा नहीं होता. किसी का डिजाइन बहुत साधारण होता है तो कोई काफी एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस होता है. असल में चार्जर का काम दीवार के सॉकेट से आने वाली AC (Alternating Current) बिजली को DC (Direct Current) में बदलना होता है, क्योंकि मोबाइल और लैपटॉप की बैटरी DC करंट पर ही काम करती है.

Chargers
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 08 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:30 AM IST
  • चार्जर लगाकर छोड़ने से क्या होता है
  • चार्जर का सही इस्तेमाल कैसे करें? जानिए

आज के दौर में शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जहां एक से ज्यादा चार्जर न हों. मोबाइल फोन, लैपटॉप, स्मार्ट वॉच, ईयरबड्स, टैबलेट हर डिवाइस के साथ चार्जर आता है. अक्सर हम मोबाइल चार्जर को बेड के पास सॉकेट में लगा छोड़ देते हैं, चाहे फोन चार्ज हो रहा हो या नहीं. लैपटॉप चार्जर भी कई बार दिन-रात प्लग में लगा रहता है. लेकिन सवाल ये है क्या ऐसा करना सुरक्षित है? और क्या इससे बिजली का बिल बढ़ता है? आइए जानते हैं.

चार्जर के अंदर आखिर होता क्या है?
हर चार्जर एक जैसा नहीं होता. किसी का डिजाइन बहुत साधारण होता है तो कोई काफी एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस होता है. असल में चार्जर का काम दीवार के सॉकेट से आने वाली AC (Alternating Current) बिजली को DC (Direct Current) में बदलना होता है, क्योंकि मोबाइल और लैपटॉप की बैटरी DC करंट पर ही काम करती है.

आसास भाषा में समझें तो AC में बिजली आगे-पीछे दौड़ती है, जबकि DC में बिजली एक ही दिशा में बहती है. बिजली घरों में बनने वाली बिजली आमतौर पर AC होती है, लेकिन आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को DC चाहिए. इसी वजह से हर चार्जर में AC से DC में बदलने वाला सिस्टम होता है. चार्जर के अंदर ट्रांसफॉर्मर, कन्वर्जन सर्किट, फिल्टर और कंट्रोल सर्किट जैसे कई छोटे-बड़े इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स होते हैं, जो वोल्टेज को कंट्रोल करते हैं.

क्या बिना इस्तेमाल के भी चार्जर बिजली खाता है?
हां. इसे वैंपायर पावर या स्टैंडबाय पावर कहा जाता है. जब चार्जर प्लग में लगा रहता है, लेकिन उससे कोई डिवाइस जुड़ी नहीं होती, तब भी वह थोड़ी-सी बिजली खपत करता है. यह बिजली चार्जर के अंदर मौजूद कंट्रोल और प्रोटेक्शन सर्किट को चालू रखने में खर्च होती है.

एक अकेला चार्जर बहुत कम बिजली खाता है, इसलिए तुरंत फर्क महसूस नहीं होता. लेकिन अगर घर में 8-10 चार्जर लगातार प्लग में लगे रहें, तो सालभर में यह खपत कई यूनिट बिजली तक पहुंच सकती है. अच्छी बात यह है कि आजकल के स्मार्ट चार्जर स्टैंडबाय पावर को कम करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं. ये चार्जर स्लीप मोड में चले जाते हैं और तभी एक्टिव होते हैं, जब कोई डिवाइस उनसे पावर खींचती है.

चार्जर लगाकर छोड़ने से क्या होता है

  • चार्जर में लगातार बिजली आने से समय के साथ उसके अंदर के पार्ट्स घिसने लगते हैं. खासकर तब, जब बिजली सप्लाई में अचानक वोल्टेज बढ़ जाए.

  • बिजली ग्रिड पूरी तरह स्थिर नहीं होता, कभी-कभी वोल्टेज फ्लक्चुएशन होता है. ऐसे में लगातार प्लग में लगे चार्जर जल्दी खराब हो सकते हैं.

  • यह खतरा खासतौर पर सस्ते और बिना सर्टिफिकेशन वाले चार्जर में ज्यादा होता है. इनमें सही सेफ्टी फीचर नहीं होते और ये ओवरहीट होकर आग लगने का कारण भी बन सकते हैं.

चार्जर का सही इस्तेमाल कैसे करें?

  • अगर चार्जर इस्तेमाल में नहीं है, तो प्लग से निकाल देना बेहतर है.

  • अगर चार्जर असामान्य रूप से गर्म हो रहा है, आवाज कर रहा है या तार कटा-फटा है, तो उसे तुरंत बदलें.

  • हमेशा क्वालिटी और सर्टिफाइड चार्जर ही इस्तेमाल करें.

  • सस्ते लोकल चार्जर से बचें, क्योंकि वे लंबे समय में ज्यादा नुकसान कर सकते हैं.

Read more!

RECOMMENDED