डीजल से चलने वाली ट्रेनें तो आपने देखी होंगी, और इलेक्ट्रिक ट्रेनों में सफर भी किया होगा लेकिन अब रेलवे एक बिल्कुल नई तकनीक पर काम कर रहा है, जहां ट्रेन न धुआं छोड़ेगी, न डीजल पर चलेगी और न ही पारंपरिक इंजन पर पूरी तरह निर्भर रहेगी. देश की पहली पूरी तरह स्वदेशी 10-कोच Hydrogen ट्रेन अब हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच दौड़ने की तैयारी में है. रेलवे मंत्रालय ने इसके संचालन को मंजूरी दे दी है.
यह ट्रेन भारत के रेलवे इतिहास में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है, क्योंकि यह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित होगी. यानी ट्रेन को चलाने के लिए हाइड्रोजन गैस का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे प्रदूषण बेहद कम होगा.
जींद से सोनीपत के बीच चलेगी ट्रेन
रेलवे बोर्ड की 22 मई की मंजूरी के अनुसार, यह ट्रेन फिलहाल हरियाणा के जींद-सोनीपत सेक्शन पर चलाई जाएगी. ट्रेन की नियमित मेंटेनेंस दिल्ली के शकूरबस्ती स्टेशन पर होगी. जरूरत पड़ने पर ट्रेन को लोकोमोटिव की मदद से जींद और शकूरबस्ती के बीच लाया-ले जाया जाएगा. रेलवे ने सुरक्षा को देखते हुए हाइड्रोजन प्लांट और रिफ्यूलिंग स्टेशन पर 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश भी दिए हैं. साथ ही शुरुआती तीन महीनों तक ट्रेन के साथ प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ मौजूद रहेगा, ताकि रास्ते में आने वाली किसी तकनीकी समस्या को तुरंत ठीक किया जा सके.
दुनिया की सबसे लंबी ब्रॉड गेज हाइड्रोजन ट्रेन
यह ट्रेन कई मायनों में खास है. रेलवे के मुताबिक, यह दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन होगी, जो ब्रॉड गेज ट्रैक पर चलेगी. इसमें 10 कोच होंगे, जिनमें 2 Driving Power Cars और 8 पैसेंजर कोच शामिल हैं. ट्रेन की कुल पावर 2400 किलोवॉट होगी और इसमें करीब 2600 यात्री सफर कर सकेंगे. इसकी अधिकतम रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है. मार्च 2026 में इसके ट्रायल रन भी किए जा चुके हैं.
हाइड्रोजन ट्रेन क्यों खास है?
हाइड्रोजन ट्रेनें फ्यूल सेल तकनीक से चलती हैं. इसमें हाइड्रोजन गैस और ऑक्सीजन के रिएक्शन से बिजली बनती है, जिससे ट्रेन चलती है. इस प्रक्रिया में धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता, सिर्फ पानी और भाप निकलती है. यही वजह है कि इसे पर्यावरण के लिए काफी सुरक्षित माना जाता है.
2800 करोड़ का प्रोजेक्ट
रेल मंत्रालय ने 2023-24 के बजट में हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना के लिए 2800 करोड़ रुपए आवंटित किए थे. इस राशि का इस्तेमाल रिसर्च, डिजाइन, टेस्टिंग और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में किया जा रहा है. Hydrogen for Heritage प्रोजेक्ट के तहत भारतीय रेलवे भविष्य में 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना बना रहा है. इन ट्रेनों को खासतौर पर हेरिटेज और हिल रूट्स पर चलाया जाएगा, ताकि पर्यटन बढ़ाने के साथ प्रदूषण भी कम किया जा सके.