Indian-American Manoj Tumu Tips: आखिर कैसे बदल रही टेक की दुनिया, इंटरव्यू से पहले कैसे करें खुद को तैयार... नहीं गंवाए कोई भी मौका

भारतीय-अमेरिकी इंजीनियर मनोज तुमु ने मेटा में मशीन लर्निंग इंजीनियर की भूमिका हासिल करने तक का सफर साझा किया. ₹3.36 करोड़ पैकेज, रिज़्यूमे टिप्स, इंटरव्यू रणनीति और AI में करियर बनाने की प्रेरक कहानी से क्या सीखा जा सकता है वह लोगों को बताया.

Manoj Tumu (Source: Social Media)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 12:50 PM IST

23 वर्षीय भारतीय-अमेरिकी मशीन लर्निंग इंजीनियर मनोज तुमु आज मेटा (Meta) की एडवरटाइजिंग रिसर्च टीम में काम कर रहे हैं और उनका कुल पैकेज 4 लाख डॉलर (लगभग ₹3.36 करोड़) से ज्यादा है. बिज़नेस इनसाइडर को दिए एक लेख में उन्होंने अपनी करियर जर्नी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों व युवाओं के लिए अहम सलाह साझा कीं.

मशीन लर्निंग में बदलाव और करियर विकल्प
मनोज बताते हैं कि मशीन लर्निंग का क्षेत्र पिछले कुछ सालों में बेहद तेजी से बदला है. क्लासिकल तकनीकों से यह अब डीप लर्निंग और न्यूरल नेटवर्क्स की ओर शिफ्ट हो चुका है. ChatGPT जैसे टूल्स के आने के बाद प्रतिस्पर्धा और भी बढ़ गई है, साथ ही नए जॉब टाइटल जैसे – मशीन लर्निंग इंजीनियर, एप्लाइड साइंटिस्ट और रिसर्च साइंटिस्ट सामने आए हैं.

मेटा में भूमिका और काम करने का तरीका
मेटा में उनकी भूमिका रिसर्च और इम्प्लीमेंटेशन दोनों को जोड़ती है ताकि कंपनी AI की रेस में सबसे आगे बनी रहे. मनोज ने बताया कि रिज़्यूमे में काम का अनुभव सबसे अहम है. शुरुआती दिनों में प्रोजेक्ट्स जरूरी होते हैं, लेकिन लंबे समय तक करियर बनाने के लिए इंटर्नशिप और प्रोफेशनल अनुभव ज्यादा मायने रखते हैं. उन्होंने अमेज़न और मेटा जैसी कंपनियों में अप्लाई करते समय प्रोजेक्ट्स हटाकर सिर्फ अनुभव को हाईलाइट किया. उन्होंने रेफरल पर भरोसा नहीं किया, बल्कि सीधे कंपनी की वेबसाइट और लिंक्डइन पर आवेदन किया.

इंटरव्यू तैयारी और रणनीति
मनोज का कहना है कि बिना तैयारी के इंटरव्यू में जाना सबसे बड़ी गलती है. उन्होंने सलाह दी कि हर कंपनी के वैल्यूज़ के अनुसार अपने जवाब तैयार करने चाहिए. अमेज़न के लिए उन्होंने "लीडरशिप प्रिंसिपल्स" पर काम किया. मेटा के लिए उन्होंने "कॉर्पोरेट वैल्यूज़" को ध्यान में रखा. मेटा का इंटरव्यू प्रोसेस लगभग छह हफ्ते चला, जिसमें स्क्रीनिंग कॉल के बाद 4 से 6 राउंड हुए. इनमें कोडिंग, मशीन लर्निंग और बिहेवियरल सवाल शामिल थे.

शुरुआती करियर और बड़ा निर्णय
मनोज मानते हैं कि कॉलेज के दौरान उन्होंने इंटर्नशिप का मौका गंवा दिया था, लेकिन ग्रेजुएशन के बाद एक कॉन्ट्रैक्ट रोल पाकर उन्होंने करियर की शुरुआत की. जब उन्हें सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और मशीन लर्निंग में से चुनना था, तो उन्होंने कम वेतन वाली मशीन लर्निंग जॉब को चुना क्योंकि यह उनके इंटरेस्ट और पैशन से जुड़ी थी. यह निर्णय आगे चलकर उनके लिए बड़े अवसर लेकर आया और उन्हें मेटा में जगह मिली.

 

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