2 छात्रों ने तैयार किया ह्यूमनॉइड AI रोबोट, 'रक्षक-01' करेगा कमाल

राजस्थान में नागौर के कस्बे कुचेरा के 2 छात्रों ने एक ह्यूमनॉइड AI रोबोट तैयार किया है. 14 साल के यश शर्मा और 16 साल के नीरज सैनी ने इस रोबोट को बनाया है. इस रोबोट को 'रक्षक-01' नाम दिया गया है.

Nagaur News
gnttv.com
  • नागौर,
  • 15 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:53 AM IST

राजस्थान के नागौर के छोटे से कस्बे कुचेरा में 2 होनहार छात्रों ने गुड न्यूज दी है. इन छात्रों की सौगात को देखकर  बड़े-बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्र भी हैरान रह जाएंगे. 14 साल के यश शर्मा और 16 साल के नीरज सैनी ने मिलकर एक ह्यूमनॉइड AI रोबोट बनाया है. ये रोबोट बातचीत करता है. इतना ही नहीं,  रियल-टाइम में पर्यावरण को समझकर सुरक्षा और निगरानी का काम भी कर सकता है. इस रोबोट को रक्षक-01 नाम दिया गया है.

सीमित संसाधनों में रोबोट विकसित किया-
यश शर्मा क्लास-9 में पढ़ते हैं. जबकि नीरज सैनी क्लास-11 में पढ़ते हैं. सीमित संसाधनों, छोटे शहर की सुविधाओं और स्कूली स्तर पर उपलब्ध टूल्स के बावजूद इन दोनों युवा प्रतिभाओं ने पायथन प्रोग्रामिंग, 3डी प्रिंटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए ऐसा रोबोट तैयार किया है, जो भविष्य की तकनीक का प्रतीक बन गया है.

कुचेरा गांव के रहने वाले हैं दोनों छात्र-
यश शर्मा कुचेरा के रहने वाले हैं. उनके पिता जयप्रकाश शर्मा एवीवीएनएल विद्युत विभाग में कार्यरत हैं, जबकि माता एक निजी स्कूल में शिक्षण कार्य करती हैं. सिर्फ 14 साल की उम्र में यश ने अपनी रुचि को विज्ञान और तकनीक की ओर मोड़ा. दूसरी ओर नीरज सैनी भी कुचेरा के ही निवासी हैं. उनके पिता जितेन्द्र सैनी हैं. 16 वर्षीय नीरज कक्षा 11 में पढ़ते हुए भी तकनीकी नवाचार में गहरी दिलचस्पी रखते हैं.

दोनों छात्रों ने बताया कि वे लंबे समय से रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में प्रयोग कर रहे थे. स्कूल की लाइब्रेरी, इंटरनेट के सीमित उपयोग और घर पर उपलब्ध पुराने कंपोनेंट्स से उन्होंने यह प्रोजेक्ट शुरू किया. कई रातों की जागरण, ट्रायल-एरर और निरंतर मेहनत के बाद आखिरकार 'रक्षक-01' तैयार हो सका.

AI रोबोट की खासियत-
मानव जैसा रोबोट 'रक्षक-01' एक ह्यूमनॉइड रोबोट है, जिसकी डिजाइन और फंक्शनैलिटी देखकर लगता है कि ये कोई साइंस फिक्शन फिल्म का किरदार है. इसकी कई विशेषताएं है.

मानव जैसी आंखें और विजन सिस्टम: रोबोट में लगी आंखें ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं घूम सकती हैं. इसमें ऑब्जेक्ट डिटेक्शन और रियल-टाइम विजन कैपेबिलिटी है, जो आसपास के वातावरण को समझकर तुरंत प्रतिक्रिया देती है.
लाइव कैमरा और निगरानी: इसमें हाई-क्वालिटी लाइव कैमरा लगा है, जिससे यह रियल-टाइम में वीडियो फीड दे सकता है. सुरक्षा गार्ड की तरह यह संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर सकता है.

वॉइस कमांड और इंटरैक्शन: वॉइस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए यह आवाज सुनकर निर्देशों का पालन करता है. साथ ही इसमें बुद्धिमान संवाद प्रणाली (Intelligent Conversation System) है, जिससे यह इंसानों से सामान्य बातचीत भी कर सकता है.

शारीरिक गतिशीलता: रोबोट का सिर, गर्दन और हाथ विभिन्न दिशाओं में हिल सकते हैं, जिससे यह अधिक प्राकृतिक और प्रभावी तरीके से काम करता है.

एआई आधारित स्मार्ट सिस्टम: पायथन प्रोग्रामिंग, ऑब्जेक्ट डिटेक्शन मॉडल्स और वॉइस इंटरैक्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर यह रोबोट पर्यावरण को समझता और उसके अनुसार एक्शन लेता है.

क्या है मकसद?
छात्रों का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा स्मार्ट सुरक्षा सिस्टम विकसित करना था जो घर, स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक स्थानों में निगरानी के साथ-साथ मानव जैसा संवाद भी कर सके. 'रक्षक-01' सुरक्षा कर्मियों की मदद कर सकता है, बच्चों की देखभाल में सहायक हो सकता है या किसी आपात स्थिति में अलर्ट जारी कर सकता है.

रोबोट बनाने में क्या चुनौतियां आईं?
रोबोट बनाने में मुख्य रूप से 3डी प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे इसके पार्ट्स को सटीक आकार दिया जा सका. पायथन भाषा में कोडिंग कर एआई मॉडल्स को इंटीग्रेट किया गया. ऑब्जेक्ट डिटेक्शन के लिए ओपन सोर्स लाइब्रेरीज और वॉइस इंटरैक्शन के लिए स्पीच रिकग्निशन टूल्स का सहारा लिया गया.

कुचेरा जैसे छोटे कस्बे में एडवांस्ड कंपोनेंट्स आसानी से उपलब्ध नहीं थे. दोनों छात्रों ने ऑनलाइन ट्यूटोरियल्स, यूट्यूब वीडियोज और ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म्स से ज्ञान लिया. कई बार प्रोटोटाइप फेल भी हुए, लेकिन हार नहीं मानी. कुल मिलाकर इस प्रोजेक्ट पर कई महीनों की मेहनत लगी.

दोनों छात्रों की हो रही तारीफ-
एक स्थानीय इंजीनियर ने कहा कि 14-16 साल के बच्चों द्वारा ऐसा रोबोट बनाना वाकई कमाल है. अगर इन्हें सही मार्गदर्शन और फंडिंग मिले तो ये बच्चे देश स्तर पर बड़ा नाम बना सकते हैं.

यश और नीरज का सपना है कि 'रक्षक-01' को और बेहतर बनाया जाए. वे इसमें और ज्यादा फीचर्स जोड़ना चाहते हैं जैसे मोबाइल कंट्रोल, ऑटोमैटिक चार्जिंग और ज्यादा एडवांस्ड एआई. वे सरकारी योजनाओं या स्टार्टअप सपोर्ट से मदद लेने की भी सोच रहे हैं ताकि यह रोबोट व्यावसायिक स्तर पर तैयार हो सके.

(केशा राम की रिपोर्ट)

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