जर्जर पड़ी इमारत गिरने का डर नहीं होगा! कंक्रीट के अंदर की बीमारी अब दिखेगी साफ, बिना तोड़े बिल्डिंग की होगी जांच

जिस तरह इंसानी शरीर में गड़बड़ी पकड़ने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है, उसी तर्ज पर अब कंक्रीट की इमारतों और पुलों की भी बिना तोड़फोड़ जांच संभव हो सकेगी। जापान और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने मिलकर ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जो कंक्रीट के भीतर मौजूद दरारों और कमजोर हिस्सों की पहचान कर सकती है.

New Ultrasonic Technology Detects Hidden Defects Inside Concrete
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 03 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:33 AM IST
  • दीवारों का किया जाता है अल्ट्रासाउंड
  • ब्रॉडबैंड अल्ट्रासोनिक सिस्टम की खासियत

इमारतों और पुलों की मजबूती काफी हद तक कंक्रीट की गुणवत्ता पर निर्भर करती है. लेकिन अगर कंक्रीट के अंदर कोई दरार हो, तो उसे बाहर से देख पाना लगभग असंभव होता है. अब जापान और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जिससे बिना बिल्डिंग को तोड़े कंक्रीट के अंदर की खामियों का पता लगाया जा सकता है.

दीवारों का किया जाता है अल्ट्रासाउंड
जैसे डॉक्टर शरीर के अंदर की समस्याएं देखने के लिए अल्ट्रासाउंड करते हैं, उसी तरह यह नई तकनीक कंक्रीट के अंदर देखने के लिए ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल करती है. यह तकनीक कंक्रीट में ध्वनि तरंगें भेजती है और जो तरंगें वापस लौटती हैं, उनसे अंदर की तस्वीर बनाई जाती है.

हालांकि कंक्रीट में पत्थर, मिट्टी, चाक, स्लेट, आयरन अयस्क और रेत जैसे कई पदार्थ होते हैं. ये अलग-अलग सामग्री सामान्य ध्वनि तरंगों को बिखेर देती हैं, जिससे साफ इमेज बनाना मुश्किल हो जाता है.

ब्रॉडबैंड अल्ट्रासोनिक सिस्टम की खासियत
तोहोकू यूनिवर्सिटी (जापान), लॉस एलामोस नेशनल लेबोरेटरी (न्यू मैक्सिको) और टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर इस समस्या का समाधान निकाला. उन्होंने एक 'ब्रॉडबैंड अल्ट्रासोनिक सिस्टम' तैयार किया, जो एक ही फिक्स्ड फ्रीक्वेंसी के बजाय कई अलग-अलग फ्रीक्वेंसी की ध्वनि तरंगें भेजता है. यह सिस्टम खुद ही सामग्री के अनुसार सही फ्रीक्वेंसी चुन लेता है, जिससे दोष और सामान्य कंक्रीट के बीच का अंतर ज्यादा साफ दिखाई देता है.

दो उपकरणों की मदद से काम
इस तकनीक में दो मुख्य उपकरणों का उपयोग किया गया है. पहला, जो कई फ्रीक्वेंसी की तरंगें उत्पन्न करता है, और दूसरा लेजर डॉप्लर वाइब्रोमीटर, जो लौटकर आने वाली तरंगों को रिकॉर्ड करता है. क्योंकि यह पहले से तय नहीं किया जा सकता कि कौन-सी फ्रीक्वेंसी कंक्रीट के अंदर से गुजर पाएगी, इसलिए सिस्टम उन सभी तरंगों को पकड़ लेता है जो बचकर वापस आती हैं. इससे उपकरण बदलने या फ्रीक्वेंसी सेट करने की जरूरत नहीं पड़ती. सिस्टम अपने आप एडजस्ट हो जाता है.

हाई-रेजोल्यूशन 3D इमेज का फायदा
इस तकनीक की मदद से कंक्रीट के अंदर मौजूद खामियों की हाई-रेजोल्यूशन 3D तस्वीर मिलती है. इससे इंजीनियर यह जान सकते हैं कि दरार कितनी गहरी है, उसका आकार क्या है और वह किस दिशा में फैल रही है. यह तकनीक मरम्मत की बेहतर योजना बनाने में मदद करेगी और समय व लागत दोनों बचाएगी. और पुल ढहने जैसे हादसे कम होंगे.

 

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