आज के समय में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुका है. बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, सोशल मीडिया, ऑफिस का काम और मनोरंजन जैसे कई काम फोन से ही होते हैं. ऐसे में हम अक्सर अपने फोन को कई दिनों तक बंद नहीं करते. लेकिन टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फोन को सप्ताह में कम से कम एक बार रीस्टार्ट करना अच्छी आदत हो सकती है. इससे फोन की स्पीड बेहतर रखने और छोटी-मोटी तकनीकी परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है.
जब फोन लंबे समय तक लगातार ऑन रहता है, तो कई ऐप्स और प्रोसेस बैकग्राउंड में चलते रहते हैं. कुछ समय बाद फोन की RAM और दूसरे सिस्टम रिसोर्स पर इसका असर पड़ सकता है. कई बार फोन में फाइलें भी जमा होती रहती हैं. इसका नतीजा यह होता है कि फोन पहले के मुकाबले थोड़ा स्लो लगने लगता है. फोन को रीस्टार्ट करने से इन चल रहे प्रोसेस को दोबारा शुरू होने का मौका मिलता है.
फोन रीस्टार्ट होने पर RAM में चल रहे कई पुराने प्रोसेस बंद हो जाते हैं और सिस्टम नए सिरे से काम करना शुरू करता है. इसके बाद कई बार ऐप्स जल्दी खुलने लगते हैं और फोन की स्क्रीन भी ज्यादा स्मूद महसूस होती है. अगर फोन बिना किसी खास वजह के स्लो हो रहा है या अचानक गर्म हो रहा है, तो एक बार रीस्टार्ट करना आसान उपाय हो सकता है.
कई बार फोन में नोटिफिकेशन देर से आने, Wi-Fi कनेक्शन में दिक्कत, Bluetooth काम न करने, ऐप बार-बार बंद होने या स्क्रीन फ्रीज होने जैसी छोटी समस्याएं आती हैं. ऐसे समय में फोन को रीस्टार्ट करने से समस्या कई बार ठीक हो जाती है. खासकर पुराने फोन, जिनमें RAM और प्रोसेसर सीमित होते हैं, उन्हें नियमित रीस्टार्ट से फायदा मिल सकता है.
सिर्फ फोन रीस्टार्ट करने से साइबर अटैक या हैकिंग से पूरी सुरक्षा नहीं मिलती. फिर भी, समय-समय पर रीस्टार्ट करने से कुछ प्रकार के मैलवेयर या स्पाइवेयर के लगातार एक्टिव रहने की संभावना कम हो सकती है. इसलिए फोन को रीस्टार्ट करने के साथ-साथ सॉफ्टवेयर अपडेट रखना और मजबूत सुरक्षा सेटिंग्स का इस्तेमाल करना भी जरूरी है.
आम तौर पर सप्ताह में कम से कम एक बार फोन रीस्टार्ट करना अच्छी आदत मानी जाती है. अगर आप फोन पर लगातार गेमिंग करते हैं, बहुत सारे ऐप्स इस्तेमाल करते हैं या फोन लंबे समय तक बंद नहीं करते, तो हर कुछ दिनों में रीस्टार्ट कर सकते हैं. इसमें कोई खर्च नहीं होता और यह फोन को बेहतर तरीके से चलाने में मदद कर सकता है.