बिहार को अकसर लोग सिर्फ नालंदा और बोधगया तक सीमित कर देते हैं, लेकिन यह धरती उससे कहीं ज्यादा, विरासत और खूबसूरती अपने सीने में समेटे हुए है. बिहार में इतिहास सांस लेता है, यहां के पत्थर तक उस दौर की भव्यता को खुद में समेटे हुए हैं. इतना ही नहीं यहां हर जगह का अपना खूबसूरत इतिहास है. अगर बिहार आए हैं, तो इन जगहों को देखे बिना वापिस मत लौटिएगा.
पहाड़ों में बसी शांति और इतिहास की गूंज- राजगीर
राजगीर कभी मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी. यही वह धरती है जहां भगवान बुद्ध और महावीर ने वर्षों तपस्या की. चारों ओर फैले पहाड़, गर्म जलधाराएं और शांत वातावरण इसे आध्यात्मिक और प्राकृतिक दोनों रूपों में खास बनाते हैं. ऐसा लगता है कि यहां की पहाड़ियां जैसे ध्यान में बैठी हों और हवा हर सांस में कोई मंत्र फुसफुसाती हो. राजगीर सिर्फ देखने के लिए नहीं बल्कि महसूस करने की चीज है.
लोकतंत्र की जन्मभूमि- वैशाली
वैशाली का नाम सुनते ही इतिहास गर्व से सिर उठा लेता है. यह दुनिया का पहला गणराज्य माना जाता है. माना जाता है कि भगवान बुद्ध ने अपना अंतिम उपदेश यहीं दिया था और जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर का जन्म भी इसी भूमि पर हुआ. यहां की मिट्टी में धार्मिक उपदेशों की खुशबू बसती है.
शाही नमूना- शेरशाह सूरी का मकबरा
सासाराम में स्थित शेरशाह सूरी का मकबरा मध्यकालीन वास्तुकला का बेमिसाल उदाहरण है. तालाब के बीच बना यह मकबरा दूर से किसी तैरते हुए महल जैसा लगता है. यह केवल मकबरा नहीं, बिहार के शौर्य की कहानी है.
वीरता और रणनीति की पहचान- रोहतास
रोहतासगढ़ किला पहाड़ों पर अडिग खड़ा है, मानो आज भी दुश्मनों को चुनौती दे रहा हो. यह किला युद्ध नीति और सुरक्षा व्यवस्था का अद्भुत उदाहरण है. यहां की दीवार आज भी अपने वीरता की कहानी कहती हैं. रोहतास सिर्फ एक किला नहीं बल्कि उस समय के साहस का प्रतीक भी माना जाता है.
पटना शहर की धड़कन- गोलघर
पटना में मौजूद गोलघर अंग्रेजों द्वारा अनाज रखने के लिए बनाया गया था, लेकिन आज यह पटना की पहचान बन चुका है. इमारत के ऊपर से गंगा और शहर का नजारा देखने लायक होता है, खास कर शाम के वक्त. सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते पैर थक जाएंगे, लेकिन जब आप ऊपर पहुंचकर पलकें उठाएंगे तो नजरें वहीं ठहर जाएंगी क्योंकि गोलघर के ऊपर से पटना का एक अलग और सुंदर रूप देखने को मिलता है.
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