अगर आप भारतीय रेलवे के एसी कोच में सफर करते हैं, तो देखा होगा कि बेडरोल किट में दो सफेद चादरें, एक कंबल, एक तकिए का कवर और एक हैंड टॉवल जरूर मिलता होगा. ज्यादातर यात्री दोनों चादरों का इस्तेमाल अपनी सुविधा के अनुसार करते हैं. हालही में संसद में रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि बेडरोल किट में दो चादरें क्यों दी जाती हैं और उनका सही इस्तेमाल करने से यात्रा के दौरान स्वच्छता कैसे बनी रहती है. अगर नहीं, तो चलिए हम आपको बताते हैं.
AC यात्रियों को क्या-क्या मिलता है
भारतीय रेलवे की ओर से फर्स्ट एसी, सेकंड एसी, थर्ड एसी और एसी इकोनॉमी में सफर करने वाले यात्रियों को टिकट के साथ बेडरोल किट दी जाती है. इस किट में दो सफेद चादर, एक तकिए का कवर, एक हैंड टॉवल और एक कंबल शामिल होता है. इसके लिए यात्रियों से अलग से कोई शुल्क नहीं लिया जाता, क्योंकि इसकी लागत टिकट किराए में पहले से शामिल रहती है.
दो चादर देने की क्या है वजह
रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए बताया कि पहली चादर को सीट या बर्थ पर बिछाना चाहिए. दूसरी चादर का इस्तेमाल कंबल और यात्री के शरीर के बीच करना चाहिए. यानी कंबल सीधे शरीर के संपर्क में नहीं आना चाहिए. इससे यात्रा के दौरान बेहतर स्वच्छता बनी रहती है.
रेलवे के अनुसार कंबलों को हर यात्रा के बाद नहीं धोया जाता, जबकि चादर, तकिए के कवर और हैंड टॉवल हर इस्तेमाल के बाद धोए जाते हैं. यह कंबल और यात्री के बीच साफ कपड़े की परत बनाकर संक्रमण और गंदगी के जोखिम को कम करने में मदद करती है.
AI तकनीक से होगी बेहतर सफाई
रेलवे ने बताया कि यात्रियों को और साफ-सुथरा लिनन उपलब्ध कराने के लिए कुछ मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित स्टेन डिटेक्शन तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. इस तकनीक की मदद से चादरों और अन्य लिनन पर लगे दागों की बेहतर पहचान की जा सकेगी और उनकी गुणवत्ता में सुधार होगा.
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