हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में आज से तीन दिवसीय तिब्बती सांस्कृतिक उत्सव की शुरुआत हो गई है, जो 30 मई तक चलेगा इस खास आयोजन को सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन और तिब्बतन सेटलमेंट ऑफिस की ओर से आयोजित किया जा रहा है यह उत्सव परम पावन दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस को समर्पित है साथ ही धर्मशाला में उनके निवास के करीब 67 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी इस कार्यक्रम को बेहद खास माना जा रहा है
तिब्बती संस्कृति और परंपरा से रूबरू हो रहे लोग
तीन दिन तक चलने वाले इस उत्सव का उद्घाटन नव-निर्वाचित सिकयोंग (Sikyong) ने किया यहां तिब्बती संस्कृति, परंपरा, खानपान और कला से जुड़ी कई गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं लोग यहां तिब्बती जीवनशैली को करीब से देख और समझ पा रहे हैं पारंपरिक तिब्बती व्यंजन, सांस्कृतिक झलकियां और कला प्रदर्शन लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं
मुफ्त इलाज और पारंपरिक दवाइयों की जानकारी
उत्सव में मेंजीखांग की तरफ से लोगों के लिए मुफ्त चिकित्सा परामर्श की सुविधा भी रखी गई है साथ ही पारंपरिक तिब्बती दवाइयों के बारे में जानकारी दी जा रही है, ताकि लोग इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति को बेहतर तरीके से समझ सकें आयोजकों का कहना है कि इसका मकसद सिर्फ संस्कृति दिखाना नहीं, बल्कि तिब्बती जीवन पद्धति से लोगों को जोड़ना भी है
नृत्य, संगीत और फिल्मों से सजेगा हर दिन
उत्सव के दौरान रोजाना स्कूल के बच्चों और तिब्बती सांस्कृतिक दलों की ओर से रंगारंग नृत्य और संगीत कार्यक्रम पेश किए जाएंगे वहीं, परम पावन दलाई लामा के जीवन पर आधारित हिंदी फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग भी तीनों दिन होगी, जिससे लोग उनके जीवन संघर्ष और विचारों को करीब से जान सकेंगे
तिब्बत के इतिहास को समझने का प्रयास
निर्वासित तिब्बत सरकार के राष्ट्रपति पेंपा सेरिंग ने कहा कि भारत में रहने के बावजूद आज भी बहुत से लोग तिब्बत के इतिहास और उसके महत्व को ठीक से नहीं जानते उन्होंने कहा कि भारत और तिब्बत की सीमा अरुणाचल प्रदेश से लेकर जम्मू-कश्मीर तक फैली हुई है, ऐसे में तिब्बत भारत की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा है
भारतीय और तिब्बती संस्कृति का संगम
वहीं, धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने इस आयोजन को भारतीय और तिब्बती संस्कृति के मेल का प्रतीक बताया उनका कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम लोगों को तिब्बती समाज, उनकी संस्कृति और उनके इतिहास को समझने का मौका देते हैं साथ ही बाहर से आने वाले पर्यटक भी तिब्बती संस्कृति को करीब से महसूस कर पा रहे हैं
ये भी पढ़ें