दुनियाभर में सोने की कीमतें पहले से ही ऊंचाई पर हैं, लेकिन इसी बीच चीन का एक कदम अब ग्लोबल मार्केट में नई हलचल पैदा कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन लगातार बड़ी मात्रा में सोना खरीदने में जुटा है. ऐसे समय में जब कई देशों की अर्थव्यवस्था युद्ध और वैश्विक तनाव के असर से जूझ रही है, चीन की यह रणनीति दुनिया भर के निवेशकों की नजर में आ गई है.
रिपोर्ट्स की माने तो चीन के केंद्रीय बैंक अप्रैल 2026 तक भारी मात्रा में सोना जामा कर रहे थे. दुनिया इसे चीन का मास्टरस्टस्ट्रोक बता रही है. चीन के इस कदम ने ग्लोबल मार्केट और डॉलर आधारित लेन-देन पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.
इतनी मात्रा में जमा किया सोना
अप्रैल 2026 तक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने करीब 8 टन अतिरिक्त सोना खरीदा, जिसके बाद देश का आधिकारिक स्वर्ण भंडार बढ़कर लगभग 7 करोड़ 28 लाख ट्रॉय औंस तक पहुंच गया. मार्च 2026 के अंत तक इन गोल्ड रिजर्व की अनुमानित कीमत करीब 342.76 अरब डॉलर आंकी गई थी.
अगर भारत और चीन की तुलना करें, तो उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत के पास करीब 880.52 मीट्रिक टन सोना है, जबकि चीन का भंडार इससे लगभग ढाई गुना अधिक बताया जा रहा है. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच चीन का यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में चर्चा का विषय बना हुआ है.
आखिर क्यों खरीद रहा है चीन इतना सोना?
जानकारों की मानें तो चीन लंबे समय से अपने गोल्ड रिजर्व को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. इसके पीछे एक बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना भी माना जा रहा है. बदलते वैश्विक हालात और आर्थिक अनिश्चितता के बीच कई देश अपने रिजर्व को सुरक्षित रखने के लिए सोने को मजबूत विकल्प मान रहे हैं. ऐसे में चीन की लगातार खरीदारी ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है.
युद्ध और तनाव के बीच सोने की मांग बढ़ी
अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक अस्थिरता के कारण सोने को सुरक्षित निवेश माना जा रहा है. जब भी दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक अकसर सोने की तरफ रुख करते हैं. इसी वजह से सोने की मांग में उछाल देखा जा रहा है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय हालात ने सोने के बाजार को काफी प्रभावित किया है.
भारत जैसे देशों पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत दुनिया के बड़े गोल्ड उपभोक्ता देशों में शामिल है और यहां शादी-ब्याह से लेकर निवेश तक में सोने की बड़ी भूमिका रहती है. ऐसे में अगर चीन की खरीदारी इसी तरह बढ़ती रही, तो ग्लोबल सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ सकता है. बढ़ती कीमतें भारत जैसे देशों के लिए चिंता की वजह बन सकती हैं, जहां सोने की मांग काफी ज्यादा रहती है.
चीन कर रहा लॉन्ग टर्म पर भरोसा
अगर विशेषज्ञों की माने तो चीन एक लॉन्ग टर्म इंवेस्टमेंट की ओर बढ़ रहा है. फिलहाल वह बाजार में हलचल नहीं लाना चाहता लेकिन भविष्य के मुनाफे के बारे में सोच रहा है, जिससे दुनियाभर के गोल्ड वायर्स उसपर डिपेंड हो सकते हैं. साथ ही चीन की करेंसी में भी मजबूती आ सकती है. हालांकि चीन की मांग का असर अब ग्लोबल मार्केट पर दिखने लगा है. चीन के साथ आम निवेशक भी सोने पर भरोसा कर रहे हैं, जिससे दाम में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है.
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