डच क्रूज शिप पर फैला हंतावायरस, 3 यात्रियों की मौत के बाद दुनियाभर में अलर्ट जारी, क्या भारत के लोगों को डरने की जरूरत है?

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, हंतावायरस एक गंभीर संक्रमण है, जो मुख्य रूप से चूहों और छोटे कृंतक जानवरों में पाया जाता है. इन जानवरों को इससे नुकसान नहीं होता, लेकिन इंसानों में यह संक्रमण जानलेवा साबित हो सकता है.

Hantavirus Outbreak
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 08 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:51 AM IST
  • अर्जेंटीना से निकले क्रूज शिप पर हंतावायरस का खतरा
  • 3 यात्रियों की मौत, WHO अलर्ट

अर्जेंटीना से रवाना हुए डच क्रूज शिप 'एमवी होंडियस' पर फैले हंतावायरस संक्रमण ने दुनियाभर की स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. जहाज पर सवार कई यात्री गंभीर रूप से बीमार हुए हैं, जिनमें से तीन लोगों की मौत हो चुकी है. मामले सामने आने के बाद वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) समेत कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं.

वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी
WHO ने गुरुवार को पुष्टि की कि इस क्रूज शिप से जुड़े अब तक 8 मामले सामने आए हैं. इनमें 5 मामलों में हंतावायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि 3 मामले संदिग्ध बताए गए हैं. संक्रमण से तीन यात्रियों की मौत होने के बाद इसे लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है. हालांकि भारत में खतरा नहीं है. भारत में हंता वायरस के मामले बेहद कम सामने आते हैं. फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है.

WHO ने साफ किया है कि यह कोई नया वायरस नहीं है और न ही कोविड-19 जैसी महामारी की स्थिति है. WHO प्रमुख ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'यह कोरोना वायरस जैसा संक्रमण नहीं है और फिलहाल महामारी जैसी कोई स्थिति नहीं है. '

12 देशों को जारी किया गया अलर्ट
WHO ने उन 12 देशों को आधिकारिक अलर्ट भेजा है, जिनके नागरिक इस क्रूज शिप से सेंट हेलेना में उतरे थे. इनमें ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, सिंगापुर और तुर्किये जैसे देश शामिल हैं. फिलहाल राहत की बात यह है कि जहाज पर मौजूद बाकी यात्रियों में संक्रमण के लक्षण नहीं मिले हैं. इसके बावजूद स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं.

क्या है हंतावायरस?
अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, हंतावायरस एक गंभीर संक्रमण है, जो मुख्य रूप से चूहों और छोटे कृंतक जानवरों में पाया जाता है. इन जानवरों को इससे नुकसान नहीं होता, लेकिन इंसानों में यह संक्रमण जानलेवा साबित हो सकता है.

यह वायरस संक्रमित चूहों के मल, मूत्र और लार के जरिए फैलता है. अगर कोई व्यक्ति इन चीजों के संपर्क में आने के बाद आंख, नाक या मुंह छू ले, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.

क्या इंसान से इंसान में फैलता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में हंतावायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता. यही वजह है कि इसे कोविड जैसी महामारी नहीं माना जा रहा है.

संक्रमण के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
हंतावायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं. संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, ठंड लगना, उल्टी और पेट दर्द की शिकायत हो सकती है. कुछ मामलों में डायरिया भी देखा गया है.

अगर समय पर इलाज न मिले तो संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है. 4 से 10 दिनों के भीतर मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और फेफड़ों में पानी भर सकता है. यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है.

संक्रमण का असर कब दिखता है?
CDC के अनुसार, संक्रमित होने के बाद इसके लक्षण दिखने में 1 से 8 सप्ताह तक का समय लग सकता है. यानी व्यक्ति संक्रमित होने के तुरंत बाद बीमार महसूस नहीं करता.

किन इलाकों में ज्यादा रहता है खतरा?
जहां चूहों की संख्या ज्यादा होती है, वहां हंतावायरस का खतरा अधिक माना जाता है. खासकर ग्रामीण इलाकों, जंगलों और ऐसे घरों में जहां चूहों का आना-जाना ज्यादा हो, वहां संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है.

क्या इसका इलाज या वैक्सीन मौजूद है?
फिलहाल हंतावायरस के लिए कोई विशेष दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर लक्षणों के आधार पर इलाज दिया जाता है. गंभीर मामलों में ऑक्सीजन सपोर्ट और आईसीयू की जरूरत पड़ सकती है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संक्रमण में मृत्यु दर करीब 38% तक हो सकती है. यही वजह है कि डॉक्टर इसे गंभीरता से लेने की सलाह दे रहे हैं.

हंतावायरस से बचाव के लिए क्या करें?

  • घर और आसपास साफ-सफाई रखें

  • चूहों को घर में आने से रोकें

  • चूहों के मल-मूत्र को सीधे हाथ से न छुएं

  • सफाई करते समय दस्ताने और मास्क पहनें

  • खाने-पीने की चीजों को ढककर रखें

  • बंद जगहों की सफाई से पहले वहां हवा आने दें

 

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