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हंता वायरस से तीन लोगों की मौत, कैसे संक्रमित करता है ये वायरस? किस इलाके में कितना खतरा? क्या इसकी कोई वैक्सीन है?

अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (सीडीसी) के मुताबिक, हंता वायरस एक खतरनाक संक्रमण है जो मुख्य रूप से चूहों और कुछ छोटे जानवरों में पाया जाता है. इन जानवरों को इससे कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन इंसानों में यह गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है.

Hantavirus Hantavirus
हाइलाइट्स
  • कैसे फैलता है हंता वायरस संक्रमण?

  • कितना खतरनाक है यह वायरस?

अटलांटिक महासागर में एक क्रूज शिप पर हंता वायरस संक्रमण के कारण अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कम से कम तीन अन्य लोग बीमार बताए जा रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग ने मामले की पुष्टि करते हुए जांच शुरू कर दी है.

क्रूज पर सवार थे 150 लोग 
WHO के अनुसार, दो मामलों की पुष्टि हो चुकी है और एक मरीज दक्षिण अफ्रीका के अस्पताल में आईसीयू में भर्ती है. टीम जहाज पर मौजूद अन्य संदिग्ध मरीजों को निकालने की तैयारी कर रही है. यह जहाज फिलहाल केप वर्डे के तट के पास खड़ा है. स्थानीय प्रशासन ने किसी को भी जहाज से उतरने की अनुमति नहीं दी है. जहाज पर करीब 150 यात्री सवार थे.

संपर्क में आए लोगों की पहचान के लिए ट्रेसिंग शुरू
पहला मृतक 70 वर्षीय व्यक्ति था, जिसकी मौत जहाज पर ही हुई. उसकी पत्नी की भी बाद में अस्पताल में मौत हो गई. तीसरे मृतक का शव अभी जहाज पर ही मौजूद है. स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि क्रूज तीन हफ्ते पहले अर्जेंटीना से रवाना हुआ था. अब संपर्क में आए लोगों की पहचान के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी गई है.

क्या है हंता वायरस और कैसे फैलता है
अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (सीडीसी) के मुताबिक, हंता वायरस एक खतरनाक संक्रमण है जो मुख्य रूप से चूहों और कुछ छोटे जानवरों में पाया जाता है. इन जानवरों को इससे कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन इंसानों में यह गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है.

यह वायरस चूहों के मल, मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है. अगर कोई व्यक्ति इन चीजों को छूने के बाद अपने चेहरे, आंख या मुंह को छूता है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. अच्छी बात यह है कि आमतौर पर यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता.

संक्रमण के लक्षण क्या होते हैं?
शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं. जैसे- तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, ठंड लगना, उल्टी और पेट दर्द. कुछ लोगों को डायरिया भी हो सकता है. अगर समय पर इलाज न मिले तो स्थिति गंभीर हो सकती है. 4 से 10 दिनों के भीतर मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और फेफड़ों में पानी भर सकता है. यह हालत जानलेवा भी हो सकती है.

संक्रमण का पता कब चलता है?
हंता वायरस का असर दिखने में 1 से 8 हफ्तों का समय लग सकता है. यानी संक्रमित होने के बाद तुरंत लक्षण नहीं दिखते.

किन इलाकों में इसका खतरा ज्यादा होता है?
जहां चूहों की संख्या ज्यादा होती है, खासकर ग्रामीण और जंगल वाले इलाके, वहां इसका खतरा अधिक रहता है. घर में चूहों की मौजूदगी भी जोखिम बढ़ा देती है.

क्या इसका इलाज या वैक्सीन मौजूद है?
फिलहाल हंता वायरस की कोई तय दवा या वैक्सीन नहीं है. मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर विशेष देखभाल दी जाती है. गंभीर मामलों में ऑक्सीजन थैरेपी की जरूरत पड़ सकती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वायरस से संक्रमित लोगों में मृत्यु दर करीब 38% तक हो सकती है. इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.

हंता वायरस से बचाव कैसे करें?

  • घर और आसपास सफाई रखें.

  • चूहों से दूरी बनाकर रखें.

  • उनके मल-मूत्र को सीधे हाथ से न छुएं.

  • सफाई करते समय दस्ताने और मास्क का इस्तेमाल करें.

  • खाने-पीने की चीजों को ढककर रखें.