भारत और अमेरिका के बीच क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर एक अहम समझौता जल्द हो सकता है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं और आने वाले महीनों में इसका आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है.
इंडिया टुडे कॉनक्लेव में बोले सर्जियो गोर
नई दिल्ली में आयोजित India Today Conclave 2026 में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते केवल टैरिफ और बाजार तक सीमित नहीं हैं. अब दोनों देश उन महत्वपूर्ण संसाधनों और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर ध्यान दे रहे हैं, जो भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी माने जा रहे हैं.
समझौते से मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा सप्लाई चेन को मिलेगा मजबूती
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित क्रिटिकल मिनरल्स समझौता एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा प्रणालियों और उनसे जुड़ी सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है. उनके मुताबिक यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करेगा.
इंडो-पैसिफिक में मिनरल्स की सप्लाई चेन मजबूत करने पर जोर
सर्जियो गोर ने यह भी कहा कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर ऐसे सप्लाई नेटवर्क को मजबूत करने पर काम कर रहा है, जिससे महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुरक्षित रह सके. इससे भविष्य की टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को स्थिर सप्लाई मिल सकेगी.
भारत अमेरिका के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंधों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में निर्णायक भूमिका निभाई है. मोदी और ट्रंप ही वे 'दो निर्णायक' थे जिन्होंने व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत अमेरिका के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार है.