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भारतीय मूल की नवी पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार, अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा के लिए मिला सम्मान

नवी पिल्लै का परिवार भारतीय तमिल मूल का है. उनका जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था. उन्होंने कानून की पढ़ाई की और रंगभेद के दौर में उन कार्यकर्ताओं का बचाव किया, जो नस्लीय भेदभाव के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे.

Navanethem “Navi” Pillay
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 09 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:59 PM IST

भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवनिथेम 'नवी' पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला है. उन्हें यह सम्मान शांति को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत बनाने के प्रयासों के लिए दिया गया है. नवी पिल्लै ने अपने करियर में रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं का बचाव किया. बाद में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अदालतों और संयुक्त राष्ट्र में अहम जिम्मेदारियां निभाईं.

नोबेल समिति के मुताबिक, ऐसे समय में जब दुनिया में युद्ध और संघर्ष बढ़ रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़ी संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव पड़ रहा है, तब कानून के जरिए विवाद सुलझाने की अहमियत याद दिलाना जरूरी है. समिति ने नवी पिल्लै के साहस, ईमानदारी और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को सम्मान का प्रमुख आधार बताया.

भारतीय तमिल परिवार में हुआ जन्म
नवी पिल्लै का परिवार भारतीय तमिल मूल का है. उनका जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था. उन्होंने कानून की पढ़ाई की और रंगभेद के दौर में उन कार्यकर्ताओं का बचाव किया, जो नस्लीय भेदभाव के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे. साल 1967 में उन्होंने अपनी लॉ फर्म शुरू की. इसके बाद उन्होंने अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की. 1988 में उन्होंने वहां से डॉक्टर ऑफ ज्यूरिडिकल साइंस की डिग्री हासिल की. यह कानून के क्षेत्र में उच्च स्तर की शोध डिग्री है.

रवांडा ट्रिब्यूनल में निभाई अहम भूमिका
1995 में नवी पिल्लै दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट में नियुक्त हुईं. 1999 में वह रवांडा के लिए बनाए गए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण की जज और अध्यक्ष बनीं. इस दौरान उन्होंने यह स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई कि यौन हिंसा और बलात्कार जैसे अपराध मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के मामलों में आरोप का आधार बन सकते हैं. उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नफरत फैलाने वाला प्रचार गंभीर अपराधों को बढ़ावा देने में भूमिका निभा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र में भी किया काम
नवी पिल्लै ने 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख के रूप में काम किया. इस दौरान उनका काम दुनिया भर में मानवाधिकारों की रक्षा और उल्लंघनों पर ध्यान दिलाने से जुड़ा रहा. 2021 से 2025 तक उन्होंने कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की अध्यक्षता भी की. 2019 में वह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में म्यांमार के खिलाफ नरसंहार के आरोपों से जुड़े मामले में अस्थायी जज के तौर पर भी नियुक्त हुईं.

अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने पर जोर
नोबेल समिति ने कहा कि शांतिपूर्ण दुनिया के लिए ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जरूरी है, जिसमें युद्ध अपराध करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए और अत्याचार के पीड़ितों को न्याय मिल सके. नवी पिल्लै का काम इसी व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़ा रहा है.

 

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