पैंक्रियाटिक कैंसर दुनिया के सबसे खतरनाक कैंसर में से एक माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते. जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक कैंसर शरीर में काफी फैल चुका होता है. अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नया ब्लड टेस्ट विकसित किया है, जो बिना लक्षण वाले पैंक्रियाटिक कैंसर को भी 97% तक एक्यूरेसी के साथ पहचान सकता है. इससे समय रहते बीमारी का इलाज शुरू किया जा सकेगा.
क्या है यह नई तकनीक?
अमेरिका की Oregon Health & Science University के वैज्ञानिकों ने यह तकनीक विकसित की है. इसमें मरीज के खून की जांच करके कैंसर के बेहद छोटे कणों को पकड़ा जाता है. ये कण ट्यूमर यानी कैंसरग्रस्त हिस्से से निकलकर खून में पहुंचते हैं.
इसके लिए वैज्ञानिकों ने एक खास माइक्रोचिप का इस्तेमाल किया. इस चिप पर छोटे-छोटे इलेक्ट्रिक पल्स दिए गए, जिनकी मदद से खून में मौजूद कैंसर से जुड़े कण पकड़ लिए गए. बाद में इन्हें चमकदार बनाया गया ताकि डॉक्टर आसानी से पहचान सकें कि कैंसर मौजूद है या नहीं. रिसर्च टीम के मुताबिक, जितने ज्यादा कैंसर बायोमार्कर होते हैं, चिप उतनी ज्यादा चमकती है. इसी आधार पर बीमारी की पहचान की गई.
स्टडी में कैसे हुआ टेस्ट?
इस रिसर्च में 36 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए. इनमें कुछ लोग पैंक्रियाटिक कैंसर के मरीज थे, जबकि कुछ को दूसरी बीमारियां थीं, जैसे पैंक्रियाटाइटिस. यह टेस्ट ब्लाइंड ट्रायल में किया गया. यानी जांच करने वाली टीम को पहले से नहीं बताया गया था कि कौन-सा सैंपल कैंसर मरीज का है. इसके बावजूद टेस्ट ने 97% तक सही रिजल्ट दिए.
मौजूदा जांच से बेहतर क्यों?
अभी पैंक्रियाटिक कैंसर की जांच के लिए बायोप्सी की जाती है. इसमें शरीर के अंदर से टिश्यू निकालकर जांच होती है. यह प्रक्रिया दर्दनाक और जोखिम भरी हो सकती है. साथ ही इसकी सटीकता करीब 79% मानी जाती है. नई ब्लड टेस्ट तकनीक ज्यादा आसान, कम दर्दनाक और अधिक सटीक बताई जा रही है.
क्यों खतरनाक है पैंक्रियाटिक कैंसर?
पैंक्रियाटिक कैंसर तेजी से शरीर के दूसरे अंगों में फैलता है. यह लिवर, फेफड़ों और पेट के हिस्सों को प्रभावित कर सकता है. यही वजह है कि इस बीमारी में मौत का खतरा बहुत ज्यादा होता है. ब्रिटेन में हर साल करीब 11,500 लोगों को यह कैंसर होता है. इनमें से केवल 10% मरीज ही पांच साल से ज्यादा जीवित रह पाते हैं. इसके अलावा भारत में पैंक्रियाज (अग्नाशय) कैंसर के हर साल लगभग 11,000 से 12,000 नए मरीज सामने आते हैं. आधे से ज्यादा मरीज तो बीमारी का पता चलने के तीन महीने के भीतर दम तोड़ देते हैं.
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)
तेजी से वजन घटना
भूख कम लगना
लगातार थकान
पेट दर्द
उल्टी या जी मिचलाना
कब्ज या दस्त
ब्लड शुगर का असंतुलित होना
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